न्यूयॉर्क। दुनिया में डेयरी प्रोडक्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर गाय के दूध की डिमांड सबसे ज़्यादा है। इसे पूरा करने के लिए और उत्पादन बढ़ाए रखने के लिए गायों को एंटीबायोटिक के इंजेक्शन बार-बार दिए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप एंटीबायोटिक गायों के दूध में रिसकर आने लगा है।
एंटीबायोटिक दवाओं के हेवी डोज के कारण यह स्थिति बन रही है। जब इस दूध का उपयोग लोग करते हैं, तो उनके शरीर में इस एंटीबायोटिक की थोड़ी-थोड़ी मात्रा पहुंच रही होती है, जो इम्यूनिटी को प्रभावित करती है। इससे बीमारी के वक्त उन्हें दिए जाने वाले एंटीबायोटिक असर नहीं करते हैं।
आ जायेंगे बीमारियों की चपेट में
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की एक हालिया स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है। अधिकांश लोग गाय के दूध का बीमारी के वक्त ज़्यादा उपयोग करते हैं। ऐसे में बीमारी से बचाव के लिए दिए जाने वाले एंटीबायोटिक का असर कम होजाता है।
एक रिसर्चर का कहना है कि दुनिया में ज़्यादातर एंटीबायोटिक्स का उपयोग डेयरी उद्योग में अधिक प्रोडक्शन के लिए किया जा रहा है। वैश्विकस्तर पर एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपटने के लिए गोवंश में एंटीबायोटिक के उपयोग को कम करना ज़रूरी है।



























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