संकल्प शक्ति। सिद्धाश्रम सरिता व मेकल पर्वतशृंंखलाओं के मध्य स्थापित पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम पर विद्यमान श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ मंदिर में बैठकर सम्पूर्ण एकाग्रता के साथ श्री दुर्गाचालीसा का पाठ करने से स्वयं में अध्यात्मिक शक्ति का अहसास होता है और इस दिव्यस्थल पर स्थित मूलध्वज साधना मंदिर की महिमा तो अपरम्पार है। नवरात्र पर्व पर यहाँ, माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा को पवित्रभाव से श्रद्धापूर्वक नमन करके सुबह-शाम के आरतीक्रम में सम्मिलित होने से भक्तों को विशेष चेतनात्मक शक्ति प्राप्त होती है।
पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम का वातावरण, अन्य दिनों की अपेक्षा शारदीय नवरात्र पर्व पर अष्टमी, नवमी व विजयदशमी को आयोजित शक्ति चेतना जनजागरण शिविर में उस समय और भी मनोरम हो उठता है, जब सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के सान्निध्य में लाखों भक्त एक साथ बैठकर माता जगदम्बे की आराधना करते हैं।
जो मनुष्य स्वस्थ चित्त व पवित्र भाव से मातेश्वरी दुर्गा का स्मरण करके नित्य श्री दुर्गाचालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन की समस्त विषमतायें समता में परिवर्तित होती चली जाती हैं। परम् श्रद्धेय सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने समाज को चेतनामंत्र जगदम्बिके दुर्गायै नम: और बीजमंत्र ‘माँ प्रदान करते हुये कहा है कि अनुष्ठान के लिये इन मंत्रों का सम्पूर्ण शुद्धता के साथ जाप करने पर मुक्ति के द्वार खुल जाते है। साधक के मन में अपवित्र विचार भी उत्पन्न होना जीवन के लिये घातक हो सकता है, क्योंकि अपवित्र विचार व अपवित्र आचरण से प्रकृतिसत्ता रुष्ट होने में देर नहीं करतीं।
चार अक्टूबर को होगा महाशक्ति शंखनाद
जैसा की मालूम है, पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम पर, ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से शारदीय नवरात्र के अतिमहत्त्वपूर्ण तिथियों- अष्टमी, नवमी व विजयदशमी (3, 4, 5 अक्टूबर 2022) को शक्ति चेतना जनजागरण शिविर, महाशक्ति शंखनाद का विशाल आयोजन, भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में किया गया है।
इस शिविर में 04 अक्टूबर को सायं 04 बजे एक लाख से अधिक भक्त सामूहिक रूप से शंखनाद करेंगे। इस शंखनाद से निश्चय ही वायुमंडल में एक पवित्र वातावरण का निर्माण होगा, जिसके प्रभाव से हमारे देश व समाज का वातावरण भी शुद्ध और पवित्र बनेगा और लोगों के अन्दर से असुरत्व की भावना समाप्त होकर देवत्व की स्थापना हो सकेगी।





























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