नई दिल्ली। भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत औपचारिक रूप से 02 सितंबर 2022 को नौसेना में शामिल हो गया। इसे प्रधानमंत्री ने लगभग एक साल के समुद्री परीक्षण पूरा करने के बाद नौसेना को सौंप दिया है। इस अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी उपस्थित रहे।
आईएनएस विक्रांत लगभग 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। भारत के समुद्री इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा जहाज है। इसकी विशेषता है कि इसमें 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़े 30 विमान एक साथ रह सकते हैं। इसमें मिग-29 के लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर शामिल हैं। युद्धपोत में लगभग 1,600 के क्रू मेंबर ले जाने की क्षमता है और इसकी लंबाई दो फुटबॉल मैदानों से अधिक है। इतना ही नहीं, विक्रांत में जांच लैब के साथ 16 बेड का अस्पताल भी और अत्याधुनिक किचन भी है। किचन पर दिन भर में 5000 थाली भोजन तैयार किया जा सकता है। आईएनएस विक्रांत में कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, डेटा नेटवर्क और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम आदि शामिल हैं
इसमें अत्याधुनिक रडार हैं, जो 500 किलोमीटर की दूरी तक के क्षेत्र को स्कैन कर सकते हैं। विक्रांत की अधिकतम गति 28 समुद्री मील की होगी और इसकी अधिकतम रेंज 7,500 नॉटिकल मील है।
विक्रांत एयरक्राफ्ट कैरियर एके 630 रोटरी कैनन के साथ-साथ कवच एंटी-मिसाइल नेवल डिकॉय सिस्टम से भी लैस होगा। इसकी क्षमता महज तीन सेकंड में टारगेट को ध्वस्त करने की है।
इसकी ऊंचाई 59 मीटेर है और पोत में 2,300 से अधिक कम्पार्टमेंट होंगे तथा इसमें महिला अधिकारियों के लिए विशेष केबिन शामिल होंगे।





























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