संकल्प शक्ति। स्वदेशी तकनीक से निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत निश्चय ही हमारे देश की बढ़ती सामरिक ताकत का अहसास कराता है और हम विदेशी ताकतों के विरुद्ध लडऩे में दिन-प्रतिदिन सक्षम होते जा रहे हैं तथा किसी भी दुश्मन देश को भारत से पंगा लेने में एक बार नहीं, बल्कि हज़ार बार सोचना पड़ेगा। लेकिन, विडम्बना यह है कि देश के अन्दर ही रह रहे कट्टरपंथी, अराजकतत्त्व व भ्रष्टाचारी देश को दीमक की तरह चाट रहे हैं और सबसे पहले हमें उनसे निज़ात पाना है।
बाहरी ताकतों से तो हम लड़ सकते हैं और उनसे लड़कर जीत भी जायेंगे, लेकिन देश के अन्दर पल रहे अराज़कतत्त्वों, भ्रष्टाचार में लिप्त नौकरशाहों, अलगाववादियों और धर्म व जाति के नाम पर आतंक का पर्याय बने राजीतिक लुटेरों बनाम भ्रष्ट राजनेताओं से देश की रक्षा कैसे हो? इनसे कैसे लड़ा जाए, इन पर नकेल कैसे कसी जाए, यह विचारणीय प्रश्न है? और जब तक इन पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं पाया जायेगा, तब तक कोई भी उपलब्धि, कोई मायने नहीं रखती, क्योंकि ये लुटेरे, ये अराजकतत्त्व अपने स्वार्थ के लिए अपने देश को बेचने से भी गुरेज़ नहीं करेंगे!
जनसेवा के प्रति समर्पित भारतीय शक्ति चेतना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन संध्या शुक्ला जी ने तदाशय की अभिव्यक्ति में कहा, ”हमारे देश को अंग्रेज़ों के चंगुल से मुक्त हुए पचहत्तर वर्ष पूरे होगए हैं और हमने तिरंगा यात्रा निकालकर आज़ादी का अमृत महोत्सव भी मनाया। देश के आज़ाद होने का उत्सव 15 अगस्त को तो हम हर वर्ष मनाते हैं, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता कि आज भी जातपात व छुआछूतरूपी नागपाश हर वर्ष न जाने कितने लोगों को निगल जाता है, सम्प्रदायिकता की आग में न जाने कितने लोग झुलसकर अपने प्राण गवाँ बैठते हैं?
कहने को तो हम स्वतंत्र देश के नागरिक हैं, लेकिन वास्तव में अनेक प्रकार की रूढिय़ों से ग्रसित हैं और इसका लाभ वही जातपात और धर्म की ठेकेदारी करने वाली राजनीतिक पार्टियाँ अपना वोटबैंक बढ़ाने के लिए उठा रही हैं। कितनी नीचता से भरा कार्य है, धर्म के नाम पर, जातपात के नाम पर एक-दूसरे को लड़ाना? आपके अन्दर अगर थोड़ी भी देशभक्ति की भावना है, तो विकृत रुढिय़ों को तोड़कर बाहर निकलें और स्वतंत्रता की सांस लें, अन्यथा इन रूढिय़ों का अपना अस्त्र बनाकर तथाकथित राजनेता आपकी स्वतंत्रता को पैरों तले कुचलते रहेंगे।
हमारे देश की यह विडम्बना ही है कि एकओर तो हम विश्व का नेतृत्व करना चाहते हैं और राष्ट्रभक्ति इतनी की उसके गीत गाए चले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे ही बीच में कुछ ऐसे लोग हैं, जो भारत की एकता और अखण्डता को, राष्ट्रभक्ति की भावना को अपनी कुत्सित व संकीर्ण मानसिकता तथा हिंसक प्रवृत्ति के कारण तोड़ देना चाहते हैं। किसी राष्ट्र का विकास उस देश के नागरिकों के आपसी सहयोग से ही संभव है, लेकिन जब नागरिक ही विकृत रूढिय़ों, जातिगत छुआछूत की भावना से ग्रसित होंगे, तो भला हमारा देश विकास के पथ पर कैसे बढ़ पायेगा और विश्व का सिरमौर कैसे बन पायेगा?
शक्तिस्वरूपा बहन ने कहा कि ”भारतीय शक्ति चेतना पार्टी ने नशे-मांस से मुक्त चरित्रवान् समाज के निर्माण के साथ ही विकृत रुढि़वादी परम्पराओं, जातिगत छुआछूत की भावना को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया है, जिससे कोई भी राजनेता वोटबैंक के लिए, धर्म व जाति के नाम पर समाज में विद्वैष न फैला सके।




























Views Today : 139
Views Last 7 days : 980
Views Last 30 days : 1696
Views This Year : 10749
Total views : 111222
Who's Online : 0
Your IP Address : 162.251.85.8