नई दिल्ली। हाल ही में संसद की एक रिपोर्ट से यह पता चला कि बाल श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार की सहायता प्राप्त योजनाओं में आवंटित की गई बजट राशि बीते तीन साल में कभी भी पूरी तरह खर्च नहीं की गई। बाल विकास संबंधित (एनसीएलपी) योजना में केंद्र सरकार द्वारा बजट में प्रावधान किए गए हैं। वर्ष 2021-22 में इस मद में 20 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान था, लेकिन योजनाओं पर केवल 18.35 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं। रिपोर्ट बताती है कि इस प्रावधान राशि में तीन वर्ष से सरकार ने लगातार बजट प्रावधानों में भी कमी की है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के मुताबिक केंद्र सरकार बालश्रम के पुर्नवास के लिए राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना ( नसीएलपी) चला रही है। इसके अतिरिक्त विधायी उपायों और पुनर्वास की नीति के माध्यम से बालश्रम प्रथा काम करने करने की कोशिश करती है। इस कार्य के लिए 2019-20 बजट में प्रावधान 78 करोड़ रुपए था, जबकि इस राशि में से कुल 77.47 करोड़ रुपए खर्च हो पाए थे। बजट प्रावधान का आंकड़ा 2020-21 में 49 करोड़ रुपए था। इस राशि में से भी केवल 41.19 करोड़ रुपए खर्च किए जा सके। एनसीपीसीआर के प्रावधानों के अतिरिक्त बालश्रम संशोधन अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में सामने आने वाली शिकायतों का निपटारा करने का प्रावधान है।
तय प्रावधानों के मुताबिक 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कोई भी कार्य लेने या रोजगार पर रखने और अन्य किसी भी व्यवसाय पर पूर्ण प्रतिबंध है। इस प्रावधान में ही ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर प्रावधान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त सरकार के पास इस बाबत जहां से भी शिकायतें प्राप्त होती हैं, उन मामलों में बालश्रम रोकने के लिए बाल श्रम संशोधन अधिनियम 2016 के तहत कार्रवाई जाती है। बाल श्रम व अन्य अपराधों के लिए देश के राज्य व केंद्र शासित प्रदेश में कार्रवाई मुख्य सचिव स्तर से की जाती है।




























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