चित्रकूट। उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित धार्मिक नगरी चित्रकूट में कुदरत का भयंकर प्रकोप देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और मानिकपुर के डोडा बांध के टूटने के कारण मंदाकिनी नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर पिछले 23 सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए खतरे के निशान से कई फीट ऊपर पहुँच गया है। इस विनाशकारी सैलाब के कारण चित्रकूट के 16 तटीय गांव पूरी तरह पानी में डूब गए हैं, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं और क्षेत्र का संपर्क पूरी तरह कट गया है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, चित्रकूट में साल 2003 के बाद यह सबसे भीषण बाढ़ है। नदी का जलस्तर रिकॉर्ड 137 मीटर के करीब पहुँच चुका है। बाढ़ का पानी रिहायशी बस्तियों, बाजारों और खेतों में 6 से 8 फीट तक भर गया है, जिससे दो मंजिला मकानों की छत तक पानी पहुँच गया है। ऐतिहासिक रामघाट, भरत घाट और निर्मोही अखाड़ा क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। सैकड़ों दुकानें और मठ-मंदिर पानी में समा गए हैं और मुख्य सड़कों पर नाव चल रही हैं।
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी जायजा लिया और तुरंत रेस्क्यू आॅपरेशन शुरू करवाया। तरौहां बस्ती सहित अन्य अत्यधिक प्रभावित ग्रामीण इलाकों में 750 से अधिक फंसे हुए ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला गया है। गहरे पानी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट करने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।




























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