Homeआयुर्वेदजामुन: मानसून से पहले खून और लिवर की सफाई का प्राकृतिक वरदान

जामुन: मानसून से पहले खून और लिवर की सफाई का प्राकृतिक वरदान

प्रकृति का एक बहुत ही सुंदर नियम है— वह जिस मौसम में जो बीमारी लाती है, उससे कुछ दिन पहले ही उसका इलाज पेड़ों पर उगा देती है। मानसून के आने से ठीक पहले बाजार में एक गहरे बैंगनी रंग का फल आने लगता है, जिसे हम ‘जामुन’ कहते हैं। बारिश के मौसम में हवा और पानी के जरिए ढेरों बैक्टीरिया और फंगस हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। ऐसे में हमारे लिवर (यकृत) और खून की शुद्धि बहुत जरूरी है। जामुन प्राकृतिक चिकित्सा का वह ‘एंटी-बैक्टीरियल’ फल है जो शरीर की ‘इम्युनिटी’ को बारिश के लिए तैयार करता है।

रक्त शोधन और लिवर की शक्ति

जामुन का स्वाद हल्का मीठा और कसैला (Astringent) होता है। आयुर्वेद के अनुसार यह ‘कसैला’ स्वाद ही खून की सबसे अच्छी सफाई करता है। जब हम जामुन खाते हैं, तो यह हमारे लिवर में जमे हुए विषाक्त तत्वों (Toxins) को निचोड़ कर बाहर निकाल देता है। यह खून में हीमोग्लोबिन (Iron) को तेजी से बढ़ाता है, जिससे त्वचा पर प्राकृतिक चमक आती है और मानसून में होने वाले फोड़े-फुंसियों से बचाव होता है।

 डायबिटीज (मधुमेह) का अचूक इलाज

जामुन में ‘जंबोलिन’ (Jamboline) नामक एक जादुई तत्व होता है। यह पेट के भीतर मौजूद स्टार्च (Starch) को शर्करा (Sugar) में बदलने से रोकता है। यही कारण है कि इसे डायबिटीज के रोगियों के लिए प्रकृति की सबसे बड़ी दवा माना गया है।

कार्यकारी संपादक,  बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी

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