हम अक्सर यह सुनते हैं कि “एसिडिटी होने पर खट्टी चीजें (जैसे नींबू, संतरा या आंवला) नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इनसे पेट में और तेजाब बनता है।” इसी डर से कई लोग गर्मियों में आंवले का सेवन बंद कर देते हैं।
प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद इस बात को सबसे बड़ी ‘अज्ञानता’ मानते हैं। आंवला स्वाद में खट्टा जरूर है, लेकिन यह पेट की एसिडिटी का सबसे बड़ा दुश्मन है! ग्रीष्म ऋतु में ‘पित्त’ (गर्मी) को जड़ से खत्म करने के लिए आंवले से बड़ी कोई औषधि इस धरती पर नहीं है।
विपाका (Post-digestive effect) का गहरा विज्ञान
आयुर्वेद में भोजन के पचने के बाद के असर को ‘विपाका’ (Vipaka) कहते हैं।
आंवला जीभ पर खट्टा और कसैला लगता है, लेकिन पेट में पचने के बाद इसका ‘विपाका’ अत्यंत ‘मधुर’ (मीठा) और ‘क्षारीय’ (Alkaline) हो जाता है।
यानी जब आंवले का रस आंतों में पहुंचता है, तो वह खून की सारी गर्मी और अतिरिक्त तेजाब को पूरी तरह शांत (Neutralize) कर देता है। यह अल्सर (पेट के छालों) को भरता है और गर्मियों में बालों के झड़ने (Hair fall) को जादू की तरह रोकता है।
मेरी राय में:
खट्टेपन के डर से प्रकृति के इस ‘अमृत फल’ (आंवले) को खुद से दूर न करें। अपनी जठराग्नि को रसायनों से बुझाने के बजाय आंवले की शीतलता से पोषित करें। जब आपका पाचन तंत्र मजबूत और शीतल होगा, तो आपकी ‘जीवनी शक्ति’ जीवन में आने वाली हर तपिश को आसानी से सह लेगी।
कार्यकारी संपादक, बृजपाल सिंह चौहान (एन. डी.) नेचुरोपैथी
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