आयुर्वेद में शहद को ‘अमृत’ माना गया है, लेकिन बाज़ार में मिल रहा मिलावटी शहद आपको नुक़सान पहुंचा सकता है। आजकल शहद में राइस सिरप, कॉर्न सिरप, शक्कर की चाशनी और कृत्रिम रंगों की मिलावट के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सुंदर और चमकीला लाल रंग देखकर शहद खरीदना समझदारी नहीं है। असली शहद का रंग और उसकी सघनता ही उसकी शुद्धता की सबसे बड़ी पहचान होती है।
अक्सर लोग मानते हैं कि शहद सिर्फ गहरे लाल या सुनहरे रंग का ही होता है, जो कि एक ग़लत धारणा है। मधुमक्खी पालकों और विशेषज्ञों के अनुसार, सरसों के फूलों से निकलने वाला प्राकृतिक शहद सफेद रंग का होता है और ठंड में घी की तरह जम जाता है। मौसम और फूलों (जैसे दिसंबर-जनवरी में) के आधार पर शहद का रंग हल्का पीला या एम्बर होता है, जबकि गर्मी के सीजन में जब आम के बौर या विशिष्ट जंगली फूल आते हैं, तब शहद का रंग गहरा या थोड़ा लाल होता है।
ज़्यादा चमक से बचें
यदि शहद बिल्कुल साफ और ज़रूरत से ज्यादा चमकीला दिख रहा है, तो उसमें कृत्रिम रंग और फिल्टरिंग केमिकल हो सकते हैं। असली शहद में पराग कणो के कारण थोड़ी धुंधली रंगत होती है।
शुद्धता जांचने के आसान तरीके: शहद को आप घर पर इन तीन तरीकों से कर सकते हैं जांच
पानी से करें जांच: पानी से भरे गिलास में शहद डालने पर यह नीचे बैठ जाएगा और आसानी से नहीं घुलेगा, जबकि मिलावटी शहद पानी में डालते ही तुरंत घुल जाएगा या फैल जाएगा।
कागज से जांच: ब्लॉटिंग या टिशू पेपर पर शहद डालने पर यह सोखेगा नहीं और न ही गीला दाग छोड़ेगा। जबकि, पानी या चाशनी की मिलावट के कारण कागज तुरंत गीला हो जाएगा। सर्दियों में जमाव: सर्दियों में या फ्रिज में रखने पर प्राकृतिक शहद दानेदार होकर जम जाता है, जबकि मिलावटी शहद कभी नहीं जमता, वह हमेशा तरल बना रहता है।
इन बातों का रखें ध्यान: बाज़ार से शहद खरीदने पर आप शहद पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण् का लोगो और प्रामाणिकता मार्क ज़रूर जांचें। सीधे उत्पादकों को प्राथमिकता: यदि संभव हो, तो स्थानीय मधुमक्खी पालकों या भरोसेमंद सरकारी आउटलेट्स से ही सीधा शहद खरीदें।





























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