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सिद्धाश्रम धाम में प्रथम चरण की कार्यकर्ता बैठक सम्पन्न

संकल्प शक्ति। पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम वर्तमान युग में केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार और धर्म-अध्यात्म का एक जीवंत केन्द्र है। सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के पावन सान्निध्य और निर्देशन में भगवती मानव कल्याण संगठन देशभर में मानवता की सेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा के कार्यों में निरंतर संलग्न है। संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं के कार्यों की समीक्षा करने, उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करने तथा आगामी लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए समय-समय पर अखिल भारतीय कार्यकर्ता बैठक का आयोजन पावन धाम सिद्धाश्रम में किया जाता है।

सिद्धाश्रम धाम में आयोजित कार्यकर्ता बैठक का प्रथम चरण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। 30 और 31 मई 2026 को चले इस दोदिवसीय वैचारिक मंथन में महाराष्ट्र और कर्नाटक के हज़ारों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं के वर्षभर के कार्यों की गहन समीक्षा की गई। 

प्रथम दिवस का प्रथम सत्र

वर्षभर के कार्यों की समीक्षा बैठक के पहले दिन प्रथम सत्र की शुरुआत प्रात: 08:30 बजे से भगवती मानव कल्याण संगठन के केंद्रीय पदाधिकारी-अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन पूजा शुक्ला जी, महासचिव सिद्धाश्रमरत्न अजय अवस्थी जी, सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप’ जी, मुख्य सचिव सिद्धाश्रमरत्न आशीष शुक्ला (राजू भईया) जी और अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में हुई। इस सत्र में महाराष्ट्र और कर्नाटक के ज़िला व तहसील पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों तथा टीमप्रमुखों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए जनजागरण और नशामुक्त अभियानों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। केंद्रीय पदाधिकारियों ने धरातल पर हुए कार्यों का बारीकी से मूल्यांकन किया और मानवता की सेवा, धर्मरक्षा एवं राष्ट्ररक्षा के क्षेत्रों में हुए कार्यों की सराहना की और संगठन का नवगठन किया।

प्रथम दिवस का द्वितीय सत्र

बैठक का सबसे महत्त्वपूर्ण और ऊर्जावान हिस्सा बैठक की प्रथम दिवस का द्वितीय सत्र रहा, जिसमें कार्यकर्ताओं को   सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का दिव्य चिंतन व मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। आपश्री ने कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद देकर उनमें नवचेतना का संचार किया और लोक-कल्याण के कार्यों को दोगुनी गति से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

दिव्य उद्बोधन

सायंकालीन बेला, प्रणाम भवन के समक्ष विशाल परिसर में महाराष्ट्र और कर्नाटक प्रान्त से आए भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता अनुशासनपूर्वक पंक्तिबद्ध बैठे हुए जयकारे लगा रहे थे कि इसी बीच 06:45 बजे ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का आगमन हुआ और उनके मंचासीन होते ही शंखध्वनि व तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण तरंगित हो उठा।

सर्वप्रथम प्रांगण में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से बीजमंत्र ‘माँ’ और ॐ का पाँच-पाँच बार उच्चारण किया। तत्पश्चात् सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने कार्यकर्ताओं को अपने दिव्य आशीर्वाद से अभिसिंचित करते हुए कहा कि ‘‘आप लोग सौभाग्यशाली हैं कि ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को प्रथम चरण की कार्यकर्ता बैठक में सम्मिलित होने का अवसर मिला। मेरे द्वारा किए जाने वाले हर एक कार्य का बहुत महत्त्व होता है। एक ऋषि की यात्रा को, एक दिव्यपुरुष की यात्रा को समाज सहजता से समझ नहीं सकता। मेरी यह सत्य की यात्रा हर पल संकल्पों से बंधी हुई है और मेरे द्वारा जो लक्ष्य आज से 40-45 वर्ष पूर्व निर्धारित किए गए थे, उनमें अंशमात्र भी परिवर्तन नहीं आया है। एक विचारधारा को लेकर समाज को लाभ पहुंचाने का हमेशा मेरा लक्ष्य रहा है और मैंने अपनी विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया। सत्य की विचारधारा पर चलना हर मनुष्य का कर्त्तव्य होता है। एक ऋषि की यात्रा पूर्णत्व की यात्रा होती है, जहाँ देवाधिदेव भी सिर झुकाते हैं।

इस पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम में जहाँ 30 वर्षों से ‘माँ’ का गुणगान चल रहा है, वहीं मेरे द्वारा यहाँ की पावन भूमि को हर पल चैतन्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस केन्द्र को इतना ऊर्जावान बनाया जा रहा है कि यहाँ आने वाला समाज युगों-युगों तक लाभान्वित होता रहे। मैं जितना एकान्त साधना करता हूँ, उतनी ही अधिक ऊर्जा आप लोगों को प्राप्त होगी। एक ऋषि अपनी सूक्ष्मशक्ति के बल पर अपनी चेतनातरंगों से कार्य करता है, जिससे हज़ारों मील दूर बैठा शिष्य भी आध्यात्मिक ऊर्जा का लाभ प्राप्त कर सके। इसीलिए मैंने अपने शिष्यों से हृदय का एक कोना नहीं, अपितु हृदय का पूरा साम्राज्य मांगा है और जो शिष्य अपने गुरु को अपने हृदय का पूरा साम्राज्य समर्पित कर देता है तथा जो यह संकल्प ले लेता है कि मैं गुरु की विचारधारा पर चल करके जीवन की यात्रा तय करूंगा, वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता चला जाता है और कभी असफल नहीं होता।

मेरे द्वारा अपने शिष्यों के साथ ही समाज को और ऊर्जा प्रदान करने का संकल्प था, इसके लिए अपनी आध्यात्मिकशक्ति को और बढ़ाने की आवश्यकता थी, अत: मैंने 10 मई 2026 से शिष्यों-भक्तों को चरणस्पर्श देना बन्द कर दिया है, सभी केवल मेरी चरणपादुकाओं को स्पर्श कर नमन कर सकते हैं। चरणपादुकाओं के स्पर्श से भी चरणस्पर्श करने के बराबर ही लाभ प्राप्त होगा। यहाँ तक कि दूर से भी मेरे प्रति नमनभाव का लाभ भी उतना ही प्राप्त होगा। नज़दीक से चरणस्पर्श कराने पर हर प्रकार के लोग चाहे शुद्ध हों या अशुद्ध, अनेक लोग तो नशे में भी चले आते थे, मेरे द्वारा कभी भी किसी को चरणस्पर्श करने से मना नहीं किया गया। इसका मेरे शरीर पर कुछ दुष्प्रभाव भी पड़ता था और जब मुझे महसूस हुआ कि समाजकल्याण के लिए अपनी चेतनाशक्ति को और विस्तारित करने की आवश्यकता है, तो मुझे यह निर्णय लेना पड़ा।  

वे लोग अतिसौभाग्यशाली हैं, जो मेरा नज़दीक से चरणस्पर्श प्राप्त कर सके हैं, अब चाहे कोई कितना भी पात्र क्यों न हो, चाहे कितना भी बड़ा तपस्वी क्यों न हो, वह मेरे चरणस्पर्श का सुख प्राप्त नहीं कर सकेगा। चरणपादुकाओं को स्पर्श करके ही संतोष करना पड़ेगा। 

मैं आज भी आपका हूँ, कल भी आपका रहूंगा और इस शरीर के न रहने पर भी आपका ही रहूंगा। सूक्ष्मरूप में भी इस सिद्धाश्रम धाम में मेरा सदा-सदा के लिए वास रहेगा। आप लोग तपस्या की पराकाष्ठा का जीवन जिएं, परोपकार की पराकाष्ठा का जीवन जिएं और परमधाम की यात्रा के पात्र बनें।

सत्य की यात्रा में, माता भगवती की यात्रा में पुरुषार्थ की, परोपकार की पराकाष्ठा होनी चाहिए और हमें इसीलिए यह जीवन मिला हुआ है। आप लोगों को जो कार्यक्षमता मिली हुई है, उसकी अंशमात्र भी चोरी न करें और यदि चोरी करते हैं, तो न गुरु से क्षमा मिलेगी, न ही परमसत्ता क्षमा करेंगी। जीवन जीने के लिए, खाने-पीने, भोग-विलास के लिए अनेक जीवन मिल जाएंगे, लेकिन यह पुरुषार्थ और परोपकारमय आध्यात्मिक जीवन शायद ही फिर कभी मिले। भगवती मानव कल्याण संगठन आपको एक ऐसा धरातल देता है कि आप मानवीयमूल्यों की स्थापना कर सकते हैं, तपस्वी बन सकते हैं, पुरुषार्थी बन सकते हैं, परोपकारी बन सकते हैं।

 आप कार्यकर्ता हैं, आपके अन्दर सहनशीलता होनी चाहिए, आपके अन्दर क्षमाशीलता होनी चाहिए, आपके अन्दर उग्रता नहीं, चैतन्यता होनी चाहिए। इसलिए मैं आप लोगों के अन्दर उग्रता नहीं, अपितु चेतनाशक्ति भर रहा हूँ। उग्रता एक राक्षसी प्रवृत्ति है, जबकि चेतनावान् बनना एक सात्विक प्रवृत्ति है, जिसके बल पर ही सत्य के पथ पर, अध्यात्म के पथ पर, पुरुषार्थ के पथ पर, परोपकार के पथ पर आगे बढ़ा जा सकता है। एक चेतनावान् व्यक्ति सोच-विचारकर कार्य करता है, आत्मकल्याण और जनकल्याण के पथ पर आगे बढ़ सकता है। अत: चेतनावान् बनने का प्रयास करें। मानवीयमूल्यों की स्थापना उग्रता से नहीं, बल्कि चैतन्यता से होती है।

सनातनधर्म को न तो आज तक कोई मिटा सका है और न कोई मिटा सकेगा और सनातन जब भी मिटेगा, उग्रता से मिटेगा, चैतन्यता से नहीं मिटेगा, सहनशीलता से नहीं मिटेगा। अत: अपने आपको चैतन्य बनाओ, सहनशील बनाओ और पाण्डवों के समान साहसी बनो। अपनी शक्ति का कभी दुरुपयोग मत करो और जो अपनी शक्ति का दुरुपयोग करेगा, परमसत्ता से उसे दण्ड मिलकर रहेगा। हाँ, इतने ताक़तवर अवश्य बनो कि न कोई आपका अहित कर सके, न कोई आपके किसी कार्यकर्ता भाई का अहित कर सके और न समाज का अहित कर सके। हमारे ऋषियों-मुनियों का, समाजसुधारकों का, देशभक्तों का इतिहास उठाकर देखो कि उनमें कितनी दिव्यता थी? वे विपरीत परिस्थितियों में भी रचनात्मक कार्य करके समाज व देश को उत्थान की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहे।

यह एक ऋषि की यात्रा है, जो आपको मानवीयमूल्यों की स्थापना के पथ पर चलाना चाहता है, समाजसुधार के पथ पर चलाना चाहता है, भेदभाव से दूर रखना चाहता है। उस दिशा में आप लोगों को चलने की आवश्यकता है। अपने बच्चों को चेतनावान् बनाओ, ताक़तवर बनाओ, धर्मवान बनाओ, कर्मवान बनाओ, ज्ञानवान बनाओ, पुरुषार्थी बनाओ, परोपकारी बनाओ, जिससे वे अपनी रक्षा कर सकें, अपने परिवार की रक्षा कर सकें, समाज की रक्षा कर सकें और देश के उत्थान में सहभागी बन सकें।

आज जो सत्तासुख भोग रहे हैं, उनमें से एक भी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रभक्त नहीं है, देश की रक्षा करने वाली पार्टी नहीं है। वे ऐसी पार्टियाँ हैं, जो सत्ता के लालच में साम्प्रदायिकता की आग लगा रहीं हैं, भ्रष्टाचार में डूबी हुई हैं। आप लोगों की नज़र में क्या कोई ऐसी पार्टी है, जो ग़रीबों और बेरोजगारों पर ध्यान दे रही हो, अच्छी शिक्षा पर ध्यान दे रही हो, स्वास्थ्य पर ध्यान दे रही हो या देश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हो? क्या कोई भी ऐसी पार्टी है, जो माफ़ियाओं पर अंकुश लगाने का कार्य कर रही हो? बेरोजगारी चरमसीमा पर है, ग़रीबी की खाई गहरी होती जा रही है, बाज़ार में 50 प्रतिशत मिलावट की चीजें मिल रही हैं, केमिकलयुक्त दूध बेचा जा रहा है, यहाँ तक कि जीवनरक्षक दवाईयों में भी मिलावट की जा रही है। फिर भी हम कहें कि सरकारें अच्छा कार्य कर रहीं हैं! ‘इण्डिया इज शाइनिंग’ का ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि सब कुछ अच्छा हो रहा है!

इसीलिए राष्ट्ररक्षा के लिए मेरे द्वारा भारतीय शक्ति चेतना पार्टी का गठन किया गया है, जिसके कार्यकर्ता नशे-मांसाहार से मुक्त हैं, चरित्रवान् हैं, पुरुषार्थी है और सबसे बड़ी बात यह है कि वे समाजसेवी हैं, परोपकारी हैं। अपनी विचारधारा को सशक्त बनाओ, स्वयं को संगठित रखो और यह यात्रा चाहे कितनी भी लम्बी क्यों न हो, इस पर विचार नहीं करना चाहिए, बल्कि हमारा लक्ष्य क्या है, इस पर ध्यान देने की ज़रूरत है। सत्य की विचारधारा पर चलने वाले एक-न-एक दिन लक्ष्य को प्राप्त कर ही लेते हैं। इतिहास गवाह है कि देर भले ही लग जाए, परन्तु आज तक सत्य को कोई पराजित नहीं कर सका है। 

आप लोग कार्यकर्ता हैं, कार्यकर्ता के रूप में इस दिव्यधाम में उपस्थित हुए हैं, तो कार्यकर्ता बनकर कार्य करिए, एक-दूसरे के प्रति सहयोगी भावना रखें और टीमप्रमुखों के साथ सामंजस्य बनाकर रखें। जहाँ भी जनजागरण की गति धीमी हो, वहाँ कार्यकर्ता पदाधिकारियों को स्वयं आगे आना चाहिए। आप लोग शक्तिसाधक हो, आपको समाजसुधार का सौभाग्य मिला हुआ है। निश्चित ही समाजसुधार का कार्य कठिन है, लेकिन असम्भव कुछ नहीं। अपने आत्मबल को जगाओ और लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ जाओ। सत्य की इस यात्रा में आपका गुरु आपके साथ है, परमसत्ता आपके साथ हैं।’’

परम पूज्य गुरुवरश्री के दिव्य चिंतन व मार्गदर्शन के उपरान्त बैठक प्रांगण में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से पाँच-पाँच बार गुरुमंत्र और चेतनामंत्र का उच्चारण किया। पश्चात् गुरुचरणपादुकाओं को श्रद्धापूर्वक स्पर्श करते हुए प्रसाद प्राप्त किया और सिद्धाश्रम धाम में संचालित अन्नपूर्णा भंडारा परिसर की ओर प्रस्थित हुए, जहाँ पहुंचकर सभी ने समभाव से बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

 द्वितीय दिवस 31 मई, सांगठनिक पुनर्गठन

 बैठक के द्वितीय दिवस पर केन्द्रीय पदाधिकारियों ने समीक्षा बैठक को अंतिम रूप दिया और उनके द्वारा प्रदेश, ज़िला व तहसीलवार प्रगति रिपोर्ट एवं कार्यकुशलता को मुख्य आधार मानते हुए संगठन के नवगठन के चयन की प्रक्रिया पूरी की गई तथा महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों के लिए चयनित नए टीमप्रमुखों को ज़िम्मेदारी सौंपी गई, ताकि आगामी अभियानों को और अधिक सुव्यवस्थित ढंग से चलाया जा सके।

अंत में बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से समाज को पूरी तरह से नशामुक्त, मांसाहारमुक्त व चरित्रवान् बनाने के अभियान में अपनी पूरी शक्ति लगाने का संकल्प दोहराया।

  वैचारिक चेतना: भगवती मानव कल्याण संगठन की अखिल भारतीय कार्यकर्ता बैठक का यह प्रथम चरण सांगठनिक सुदृढ़ता और सामाजिक चेतना की दृष्टि से अद्वितीय रहा। पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम से प्रस्फुटित होने वाली यह वैचारिक चेतना समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन ला रही है।

सिद्धाश्रम धाम से दिशा-निर्देश प्राप्त कर लौटे कार्यकर्ता जब ज़मीनी स्तर पर कार्य की गति को बढ़ाएंगे, तो निश्चित रूप से एक स्वस्थ, नशे-मांसाहार से मुक्त, चरित्रवान्, चेतनावान् और भेदभाव से रहित भयमुक्त समाज का निर्माण होगा तथा हमारा भारत पुन: विश्वगुरु के पद पर आसीन होकर विश्व की मानवता का मार्गदर्शक बनेगा।

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