Homeआयुर्वेदगन्ने का रस लिवर का प्राकृतिक रक्षक

गन्ने का रस लिवर का प्राकृतिक रक्षक

गर्मियों में बच्चों को ‘फ्रूट जूस’ के नाम पर जो टेट्रा-पैक (Tetra packs) पिलाए जाते हैं, प्राकृतिक चिकित्सा उन्हें स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा धोखा मानती है। इन पैकेट्स में फलों का असली रस न के बराबर होता है; ये केवल उबाले गए ‘शुगर सिरप’ (Liquid Sugar) और कृत्रिम रंगों से बने होते हैं। उबलने (Pasteurization) के कारण इनके सारे ‘जीवित एंजाइम्स’ (Live Enzymes) मर चुके होते हैं।

यदि शरीर को गर्मियों में सचमुच हाइड्रेट (Hydrate) करना है और भयंकर गर्मी से लिवर को बचाना है, तो प्रकृति ने हमें सबसे शुद्ध और मीठा ‘सलाइन वॉटर’ दिया है— ‘ताजा गन्ने का रस’।

लिवर की प्राकृतिक धुलाई (Detoxification)

सर्दियों के भारी आहार से हमारा लिवर अक्सर सुस्त पड़ जाता है। गन्ने का रस क्षारीय (Alkaline) होता है। जब यह पेट में जाता है, तो यह लिवर में जमे हुए टॉक्सिन्स को धोकर मल-मूत्र के रास्ते बाहर कर देता है।

•यही कारण है कि आयुर्वेद में पीलिया (Jaundice) जैसी भयंकर लिवर की बीमारी में गन्ने का रस अमृत माना गया है। यह शरीर में बिलिरुबिन (Bilirubin) के स्तर को तुरंत नीचे ले आता है।

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