Homeदेश प्रदेशधर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक की सजा, विधेयक पारित

धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक की सजा, विधेयक पारित

 रायपुर। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा  विधानसभा में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ पेश किए जाने पर सदन में भारी हंगामा हुआ। विपक्षी कांग्रेस ने इसे समीक्षा के लिए ‘चयन समिति’ के पास भेजने की मांग की, जिसे अस्वीकार किए जाने के बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह क़ानून राज्य की सामाजिक समरसता बनाए रखने और ग़रीबी व अज्ञानता का फायदा उठाकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए ज़रूरी है। अंत में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ ध्वनिमत से पारित होगया।

 गैर-जमानती अपराध: नए क़ानून के तहत धर्मांतरण से जुड़े सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती  होंगे।

पूर्व सूचना देना ज़रूरी: धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को ज़िला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले सूचना देनी होगी।

सजा के श्रेणीवार कड़े नियम  

सामान्य मामले: बल, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर 07 से 10 साल की जेल और 05 लाख रुपए का जुर्माना।

विशेष वर्ग: यदि पीड़ित नाबालिग, महिला या दिव्यांग है, तो सजा 10 से 20 साल की जेल और 10 लाख रुपए का जुमार्ना।

सामूहिक धर्मांतरण: सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कराने के आयोजकों को उम्रकैद और न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माने का भुगतान करना पड़ेगा।

 पैतृक धर्म में वापिसी धर्मान्तरण नही: नए विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने ‘पैतृक धर्म’ में वापस लौटता है (घर वापसी), तो उसे इस क़ानून के दायरे में धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।

संबंधित खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

आगामी कार्यक्रमspot_img

Popular News