दिनांक 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ मनाया जाता है और यह दिन केवल पानी बचाने की रस्म अदायगी का नहीं, बल्कि धरती पर जीवन के सबसे आधारभूत तत्त्व के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझने का अवसर है। विश्व जलदिवस का उद्देश्य यह बताना है कि जल संकट का सबसे गहरा प्रभाव महिलाओं और बालिकाओं पर पड़ता है तथापि जल प्रबंधन में उनकी भागीदारी ही स्थायी समाधान की कुंजी है।
आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में लगभग 210 करोड़ लोग आज भी शुद्ध व सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। भारत जैसे विकासशील देशों में पानी भरने की मुख्य ज़िम्मेदारी महिलाओं की होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ग्रामीण महिलाएं पानी लाने के लिए रोजाना औसतन कई घंटे पैदल चलती हैं।
भारत की स्थिति और सरकारी प्रयास
भारत की आबादी दुनिया की आबादी का 18 प्रतिशत है, लेकिन हमारे पास दुनिया के शुद्ध व सुरक्षित पानी के संसाधनों का केवल 04 प्रतिशत हिस्सा ही है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जल संरक्षण की दिशा में महत्त्वपूर्ण सुधार किए हैं, जो निम्नवत् हैं-
जल जीवन मिशन
मार्च 2025 तक भारत के 70 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है, जो 2019 में मात्र 16.7 प्रतिशत था।
भूजल में सुधार
वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सुरक्षित भूजल इकाइयों की संख्या बढ़कर 73.4 प्रतिशत हो गई है, जो 2017 में 62.6 प्रतिशत थी।
बदलते समय की मांग
इस वर्ष की थीम हमें याद दिलाती है कि जल संचयन के फैसलों में महिलाओं को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। जब जल समितियां और पंचायतें महिलाओं को निर्णय लेने की शक्ति देती हैं, तो जल का वितरण अधिक न्यायपूर्ण और टिकाऊ होता है।
आइए संकल्प लें
इस विश्व जलदिवस पर आइए हम सभी संकल्प लें कि हम न केवल पानी बचाएंगे, बल्कि जल प्रबंधन के हर स्तर पर ‘समानता’ को भी बढ़ावा देंगे। क्योंकि जब पानी सुरक्षित होगा, तभी समाज सशक्त होगा।




























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