भोपाल। मध्यप्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा स्वयं सेवा चाहती है, क्योंकि अधिकांश एम्बुलेंस खटारा हो चुकी हैं, जिनसे मरीजों की जान जा सकती है। प्रदेश के विभिन्न ज़िलों से मिल रही खबरों के अनुसार, कहीं एम्बुलेंस का दरवाजा जाम होने से मरीजों की मौत हो रही है, तो कहीं ईंधन की कमी और तकनीकी खराबी के कारण गाड़ियां सड़कों पर खड़ी होजाती हैं।
हाल ही में सतना ज़िला अस्पताल के गेट पर एक हृदय विदारक घटना सामने आई। 67 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज को एम्बुलेंस से लाया गया, लेकिन एम्बुलेंस का पिछला दरवाजा जाम हो गया और जब तक दरवाजा खोला गया, मरीज की मौत हो चुकी थी।
बड़वानी ज़िले में एम्बुलेंसों की हालत इतनी खराब है कि आए दिन रास्ते में ही खराब होजाती हैं। इसी तरह अन्य ज़िलों में चल रहीं 108 एम्बुलेंसों की स्थिति है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन एम्बुलेंसों को बदलने की मांग की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को केवल नई ‘एयर एम्बुलेंस’ जैसी योजनाओं पर ध्यान देने की बजाय ज़मीनी स्तर पर संचालित 108 सेवा के बेड़े को आधुनिक बनाने की ज़रूरत है।




























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