गुलाब के फूल को फूलों का राजा कहा जाता है, क्योंकि गुलाब जितना देखने में सुन्दर लगता है, उससे अधिक इसकी सुगन्ध मन को भाती है। इतना ही नहीं, यह आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर भी है। गुलाब का फूल देवी-देवताओं के चरणों में प्रमुखता से चढ़ाया जाता है।
गर्मी के दिनों में तो गुलाब का शर्बत पीने से बहुत राहत मिलती है। आप जब भी गर्मियों में सफर करके घर पहुंचे, तो गुलाब का शर्बत बनाकर पियें, इससे मन की बेचैनी दूर होगी। गर्मी की वजह से होने वाला सिरदर्द सही होता है और रात्रि में अच्छी नींद भी आती है।
ताजे गुलाब के फूलों को धनिया के फल तथा खीरा के बीज, कालीमिर्च के साथ पीसकर प्रतिदिन एक गिलास शर्बत बनाकर पिया जाए, तो शरीर की गर्मी सन्तुलित रहती है और मन प्रसन्न रहता है तथा सरदर्द व आलस्य दूर होता है। इसके ताजे फूलों को शहद के साथ खाने से पेट साफ होता है, गैस बनना सही होता है, गुलाब के फूलों का गुलकन्द बनाकर खाने से महिलाओं की मासिक से सम्बन्धित परेशानी सही होती है और प्रदर रोग में भी लाभ मिलता है।
गुलाब के फूलों का अर्क आंख में डालने से आई हुई आंख सही होती है, आंख को लालिमा सही होकर आंख का दर्द भी सही होता है। गुलाब के ताजे फूलों की पंखुड़ियों को सतावर व अनार के छिल्के के साथ पीसकर मुंह में लेप करने से मुंह की झांई तथा मुहासे सही होते हैं। गुलाब के ताजे फूल या सूखे हुये फूल तथा अमरूद के पत्तों को मिलाकर उसका काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से मुंह के छाले सही होते हैं। इस काढ़े को एक बार बनाकर जब वह ठंडा होजाये तो सुबह, दोपहर व शाम को मुंह में डालकर 05 मिनट तक मुंह में रखकर मुंह में ही रखकर इधर-उधर हिलाते रहें, इसके बाद उसे अन्दर गुटक जाएं, दो तीन दिन में ही मुंह के छाले सही हो जाते हैं।
ताजे गुलाब के फूलों के बने गुलकन्द को प्रतिदिन 10 ग्राम की मात्रा में गर्मियों में खाने से फेफड़े, गुर्दा, आंतों, गर्भाशय तथा आमाशय को ताकत मिलती है। गुलाब के ताजे फूलों को पीसकर योनिमार्ग में रखने से योनि से सम्बन्धित रोग सही होते हैं तथा प्रदर रोग में लाभ मिलता है। वहां होने वाला दर्द भी सही होता है।





























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