भारत की मिट्टी में जन्मे और पले-बढ़े रामनाथन जी ने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। उनको वर्ष 2026 के क्रैफोर्ड पुरस्कार के लिए चुना गया है। ये पुरस्कार ‘रॉयल स्वीडिश एकेडमी आफ साइंसेज’ द्वारा दिया जाता है। इस सम्मान को ‘भू-विज्ञान का नोबेल’ कहा जाता है. यह पुरस्कार रामनाथन के उन दशकों के शोध को मान्यता देता है, जिन्होंने ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रति हमारी समझ को पूरी तरह बदल दिया।
82 वर्षीय रामनाथन की सबसे ऐतिहासिक खोज वर्ष 1975 में हुई थी, जब वे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी में काम कर रहे थे। उन्होंने दुनिया को बताया कि केवल कार्बन डाइआक्साइड ही धरती को गर्म नहीं कर रही है, बल्कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन, जो उस समय एरोसोल और फ्रिज में धड़ल्ले से इस्तेमाल होते थे, उड2 की तुलना में वातावरण में गर्मी रोकने में 10,000 गुना अधिक प्रभावी हैं।
क्रैफोर्ड पुरस्कार के तहत उन्हें 08 मिलियन aस्वीडिश क्रोनोर (लगभग 09 लाख डॉलर या 7.5 करोड़ रुपये) की नक़द राशि और एक स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार मई 2026 में स्टॉकहोम और लुंड में आयोजित ‘क्रैफोर्ड डेज’ के दौरान दिया जाएगा। वर्तमान में वे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो में प्रतिष्ठित प्रोफेसर एमेरिटस हैं और उन्होंने जलवायु नैतिकता पर वेटिकन और दुनिया के कई बड़े नेताओं को सलाह दी है।





























Views Today : 3
Views Last 7 days : 197
Views Last 30 days : 658
Views This Year : 9250
Total views : 109723
Who's Online : 0
Your IP Address : 162.251.85.8