उज्जैन। उच्च शिक्षा व्यवस्था से सम्बद्ध एक नया नियम इन दिनों बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है औ देशभर में इकसा विरोध किया जा रहा है। मंगलवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के इस नए कानून का जमकर विरोध किया गया। उज्जैन में टॉवर चौक पर सवर्ण समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और इस काले कानून को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान अ.भा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष और पं महेश शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अ.भा. पुजारी महासंघ ने यूजीसी कानून पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि समानता के नाम पर लाया गया कोई भी कानून अगर असमानता का भय पैदा करे, तो उस पर पुनर्विचार आवश्यक है। 21वीं सदी जातिवाद की समाप्ति का समय है और हिंदू समाज की एकता और अखंडता को बनाए रखने की जरूरत है। अत: सरकार को जल्द इस मुद्दे पर सकारात्मक फैसला लेना चाहिए।
नए कानून में क्या है?
अब तक मुख्य रूप से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायते एससी और एसटी समुदाय तक सीमित थीं। नए रेगुलेशन के तहत ओबीसी वर्ग को भी स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ होने वाले उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज करा सकेंगे।





























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