हिन्दू धर्म में गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ माह में आती है। इस दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इसमें माता जगदम्बे की गुप्त रूप से पूजा की जाती है, इसलिए इसे गुप्त नवरात्र कहते है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें शारदीय और चैत्र नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्र भी होती हैं। गुप्त नवरात्र का विशेष महत्त्व साधना और तंत्र-उपासना से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा गुप्त विधि से की जाती है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में की गई साधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्र का आरंभ होता है। प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 जनवरी 2026, सोमवार को सुबह 01:21 बजे से हो रही है। वहीं, प्रतिपदा तिथि का समापन 20 जनवरी 2026, मंगलवार को सुबह 02:14 बजे के लगभग हो रहा है। ऐसे मे उदयातिथि के अनुसार, माघ गुप्त नवरात्र का शुभारंभ 19 जनवरी 2026 से होगा।
दस महाविद्याओं की होती है पूजा
पहला दिन माँं काली, दूसरा दिन माँ तारा, तीसरा दिन माँ त्रिपुर सुंदरी, चौथा दिन माँ भुवनेश्वरी, पाँचवा दिन माँ छिन्नमस्तिका, छठा दिन माँ त्रिपुर भैरवी, सातवां दिन माँ धूमावती, आठवां दिन माँ बगलामुखी, नौवां दिन माँ मातंगी और दसवें दिन माँ कमला की पूजा व आराधना की जाती है।
गुप्त नवरात्र का धार्मिक महत्त्व?
शास्त्रों के अनुसार, गुप्त नवरात्र मुख्य रूप से तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और कठिन साधनाओं के लिए जानी जाती है। यह नवरात्र आध्यात्मिक उन्नति लिए और मानसिक शक्ति प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम मानी गई है।





























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