मकरसंक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन का पुण्यकाल अपराह्न 03:13 बजे से शाम 04:58 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में किया गया स्नान-दान और पूजा कई गुना पुण्य फल प्रदान करती है। माना जाता है कि इस शुभ काल में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
धार्मिक महत्त्व
मकरसंक्रांति का यह पर्व उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। जब सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं। उत्तरायण को आध्यात्मिक उन्नति का काल माना गया है। इस समय किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल शीघ्र प्राप्त होता है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि मकरसंक्रांति के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती अथवा किसी भी पवित्र जलस्रोत में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का क्षय होता है। साथ ही ब्राह्मणों, साधुओं और दीन-दु:खी, निर्धन, ज़रूरतमंद लोगों को दान देने से भगवान् सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मकरसंक्रांति की पूजा विधि
मकरसंक्रांति के दिन प्रात:काल शुभ मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें-
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।।
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याभंतर: शुचि:।।
स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए तांबे का लोटा लें और उसमें स्वच्छ जल भरें। जल में पुष्प, तिल, गुड़ और रोली मिलाएं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें और अर्घ्य देते समय श्रद्धापूर्वक ‘ॐ सूर्याय नम:’मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात सूर्यदेव को तिल के लड्डू, खिचड़ी और व्यंजन अर्पित करें। अंत में भगवान् सूर्य को प्रणाम करके परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना करें।





























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