इंदौर। इंदौर में दूषित पानी से 17 लोगों की मृत्यु ने पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरों में पेयजल आपूर्ति में बड़ा योगदान नदियों और जलाशय का है, लेकिन उद्योगों का रसायनयुक्त पानी इनमें मिलने से आम लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में 2,515 उद्योग ऐसे हैं, जो जलस्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। इन उद्योगों ने प्रदूषित जल के ट्रीटमेंट के भी कोई उपाय नहीं किए और दूषित जल सीधे जलस्रोतों में छोड़ दिए। ऐसे लाल (रेड) श्रेणी के उद्योगों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी चुप्पी साधे हुए है।
नियमों की अनदेखी
गौरतलब है कि उद्योगों की स्थापना और संचालन के लिए जल प्रदूषण नियंत्रण सहित अन्य पर्यावरण संबंधी अनुमतियां अनिवार्य हैं। प्रदेश में संचालित 5,961 उद्योगों ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से समेकित सहमति और प्राधिकरण (कंसोलिडेटेड कंसेंट एंड अथाराइजेशन-सीसीए) नवीनीकरण नहीं कराया है। ये अनियंत्रित प्रदूषण फैला रहे हैं, इनसे निकलने वाला अपशिष्ट नदियों के जल को जहरीला बना रहा है। इनके अपशिष्ट से नदियों का इको सिस्टम बिगड़ रहा है।




























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