Homeजनजागरणसच्चे अर्थों में सनातनधर्म के रक्षक कौन? : बहन पूजा शुक्ला

सच्चे अर्थों में सनातनधर्म के रक्षक कौन? : बहन पूजा शुक्ला

संकल्प शक्ति, नरसिंहगढ़। परम कृपालु ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से दिनांक 21-22 दिसम्बर 2025 को श्रीराम मंदिर प्रांगण, नरसिंहगढ़, तहसील-पथरिया, ज़िला-दमोह में 24 घंटे के श्री दुर्गाचालीसा अखंड पाठ का क्रम सम्पन्न हुआ।

समापन बेला पर भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न पूजा शुक्ला जी ने उपस्थित भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘हमें अपने राष्ट्र की रक्षा करना है और इसके लिए राष्ट्र के अन्दर हो रहे अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध आवाज़ उठाना होगा। हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान किया, उनका भी परिवार था और यदि वे अपने परिवार को प्राथमिकता देते, तो आज यह देश स्वतंत्र न हुआ होता। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना, तभी हम आज स्वतंत्रता की सांस ले पा रहे हैं। उन स्वतंत्रता सेनानियों के पदचिन्हों पर चलकर कम-से-कम हम अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध आवाज़ तो उठा ही सकते हैं, नशाामुक्त भारत, खुशहाल भारत के लिए आवाज़ तो उठा ही सकते हैं और तभी हम राष्ट्र की रक्षा कर सकेंगे।

जो लोग यह कहते हैं कि हम सनातनी हैं, हम सनातनधर्म के रक्षक हैं, तो उनसे यह कहना चाहती हूँ कि अगर वे मानवता की सेवा, धर्म की रक्षा और राष्ट्र की रक्षा आदि मानवीय कर्त्तव्यों का पालन नहीं करते हैं, तो अपने आपको सनातनी कहने का अधिकार नहीं रखते। जो लोग सत्ताओं पर बैठे हैं, जो नशे को बन्द नहीं करवाना चाहते, जो अपने प्रदेश को नशामुक्त नहीं करवा पा रहे हैं, वे सच्चे अर्थों में सनातनी नहीं हो सकते। क्योंकि, वे समाज को नशारूपी ज़हर पिला रहे हैं, जिसका पान राक्षस किया करते थे, जिसका पान अन्यायी-अधर्मी किया करते थे। आज अगर किसी के पास क्षमता है कि वह गर्व से यह कह सके कि हम सनातनी हैं, हम सनातनधर्म के रक्षक हैं, तो वह है भगवती मानव कल्याण संगठन। जिस संगठन के लाखों गुरुभाई-बहन मानवीय कर्त्तव्यों का निर्वहन करते हुए नशामुक्ति का अभियान चला रहे हैं और करोड़ों लोगों को नशा-मांसाहारमुक्त चरित्रवान् बनाकर राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ चुके हैं।

     अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं, जब आप सुबह उठते हो, तो अपने बच्चों को भी उठा दें और अपने साथ पूजनक्रम में बैठाएं, उन्हें योग-ध्यान-साधना के लिए प्रेरित करें, जिससे वे धर्मवान, कर्मवान बन सकें। यदि ऐसा नहीं करेंगे, तोे आपकी बात भी नहीं सुनेंगे और ऐसा हो भी रहा है। आप लोग ही कहते फिरते हो कि हमारे बच्चे हमारी बात नहीं सुनते और ग़लत रास्ते पर जा रहे हैं। क्या यह कभी सोचा है कि  ऐसा क्यों हो रहा है? इसलिए कि आपने अपने बच्चों को  संस्कारवान बनाया ही नहीं, धर्मवान और कर्मवान बनाया ही नहीं और इसी का परिणाम भोगना पड़ रहा है। यदि आप लोग चाहते हैं कि आपके बच्चे आपकी बात मानें, ग़लत रास्ते पर न जाएं, तो उन्हें बचपन से ही संस्कार देना शुरू कर दें।’’

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 बहरोल, सागर। दिनांक 22-23 दिसम्बर को ग्राम-बहरोल, तहसील-बण्डा, ज़िला-सागर में सम्पन्न हुए 24 घंटे के श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ कार्यक्रम के समापन अवसर पर भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न शक्तिस्वरूपा बहन पूजा शुक्ला जी ने परम पूज्य सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज की आत्मकल्याणकारी और जनकल्याणकारी विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘‘ यह हमारी चाहत है, इसे लालच भी कह सकते हैं कि ‘माँ’ का कौन सा ऐसा भक्त नहीं है, गुरुवरश्री का कौन सा ऐसा शिष्य नहीं है, जो उनसे पूर्णत्व का आशीर्वाद नहीं चाहता?

परम पूज्य सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने हमें बताया है कि ‘अगर पूर्णता का आशीर्वाद चाहिए, तो आत्मकल्याण के साथ-साथ जनकल्याण की भावना के साथ साधना करना पड़ेगा। और, जब इतनी बड़ी संख्या में शक्तिसाधक-साधिकाएं एकसाथ बैठकर साधना करें और उस साधना में सम्मिलित होने का अवसर मुझे मिले, तो इससे बड़ा सौभाग्य और कुछ नहीं हो सकता। गुरुवर ने हमें हर पल समाजकल्याण के पथ पर चलने की प्रेरणा दी है, हमें वह आत्मबल प्रदान किया है कि विषम परिस्थितियों में भी कर्त्तव्यपथ पर हमार क़दम आगे बढ़ते रहें। गुरुवर ने वह चेतना प्रदान की है कि हम हर परिस्थितियों में आत्मकल्याण के साथ-साथ जनकल्याण की भावना को चरितार्थ करें।

एक छोटी सी समस्या किसी व्यक्ति के जीवन में आती है, तो वह व्यथित होजाता है, उसका परिवार व्यथित होजाता है, कुछ तो आत्महत्या तक कर लेते हैं। लेकिन, गुरुवर ने हमें ज्ञान कराया है कि समस्याएं तो आती-जाती रहती हैं,  यह सब तो कर्मों का फल है, जो हमारे साथ जुड़ा रहता है। फिर भी यदि कोई चाहे तो अपने विवेक को जाग्रत् करके, सोचने-समझने की क्षमता को विकसित करके, सद्कर्मों के बल पर अपने भाग्य को परिवर्तित कर सकता है, आने वाली बड़ी-से-बड़ी समस्या को छोटी कर सकता है।’ इस गांव में माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बे का इतना बड़ा अनुष्ठान हुआ और सौभाग्यशाली हैं वे लोग, जिन्हें इस प्रांगण में बैठकर इसमें सम्मिलित होने का अवसर मिला।

   समाजकल्याण का जो प्रण हमने लिया है, उस प्रण को हमें हर हाल में पूरा करना है, जिससे कि हम जब परम पूज्य गुरुवरश्री के चरणों के पास उपस्थित हों, तो हमारे मन में यह भावना न आए कि कुछ काम अधूरा तो नहीं रह गया!  जिस अभियान में हम आप लगे हुए हैं, उसके सामने समस्याएं भी आएंगी, परेशानियाँ आएंगी, धमकियाँ मिलेंगी, लेकिन हमें अपने पथ से विचलित नहीं होंगे, क्योंकि हम चेतनावान् ऋषि के शिष्य हैं। गुरुवर ने कहा है कि ‘आप अगर मानव हो, मानवीय कर्त्तव्य का निर्वहन करना चाहते हो, तो अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध आवाज़ उठाओ।’

    अपने मन में अच्छे विचारों को प्रवाह दें, ग़लत विचारों को बढ़ावा न दें। आपको अपनी शक्ति का उपयोग करना है, तो अनीति-अन्याय-अधर्म के विरुद्ध करें। छोटी-छोटी बातों में अपनी ऊर्जा को नष्ट न करें। कर्म करते हुए भी माँ की स्मृति अपने मन में बनाए रखें और अपने बच्चों को अच्छा संस्कार दें।’’

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