अरंडी का तेल, जिसे कैस्टर ऑइल कहा जाता है, प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में एक महत्त्वपूर्ण औषधि के रूप में वर्णित है। इसे संस्कृत में एरण्ड तैल कहा गया है। आज के समय में कई लोगों को तो इस तेल के बारे में ज़्यादा पता भी नहीं है, ऐसे में अगर बिना सही जानकारी के इसका उपयोग किया जाता है, तो इसके नुकसान भी हो सकते हैं। यह तेल अरंडी के पौधे के बीजों से तैयार किया जाता है और इसका उपयोग हजारों वर्षों से औषधि, सौंदर्य और घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है। आयुर्वेद में अरंडी तेल को विशेष स्थान दिया गया है क्योंकि इसमें कई तरह के गुण पाए जाते हैं।
अरंडी के तेल के गुण और तासीर :-
आयुर्वेद के अनुसार, अरंडी का तेल गुरु (भारी) और स्निग्ध (चिकना) गुणों वाला होता है। इसकी तासीर वात और पित्त शामक होती है, यानी यह दोनों दोषों को शांत करने में मदद करता है। इसका वीर्य शीत माना जाता है यानी इसका प्रभाव ठंडा होता है। यह तेल मुख्य रूप से वात रोग में उपयोगी है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार बड़ी आंत को वात का स्थान माना गया है। जब बड़ी आंत में वायु अधिक बढ़ जाती है या मल बकरी की तरह छोटे-छोटे गोल आकार का होने लगता है, तब अरंडी का तेल विशेष रूप से फायदेमंद साबित होता है। अरंडी का तेल त्वचा पर लगाने से ज़्यादा खाने में फायदे करता है। यदि किसी व्यक्ति को त्वचा पर हल्की-फुल्की खारिश या खुजली की समस्या है तो अरंडी तेल से मालिश करने पर आराम मिलता है।
अरंडी के तेल का उपयोग कैसे करें? :-
अरंडी तेल का सेवन विरेचन (शरीर की शुद्धि) के लिए किया जाता है। विशेषज्ञ बतलाते हैं कि यह रूक्ष विरेचन के लिए प्रयोग होता है। इसका अर्थ है कि यह हर किसी को लाभ नहीं देता, बल्कि खासकर उन लोगों को फायदा पहुंचाता है, जिनमें वात दोष बढ़ा हुआ होता है। यदि किसी व्यक्ति का मल बकरी के मल की तरह छोटा और कठोर है, तो अरंडी तेल लेने से कब्ज में राहत मिलती है। लेकिन जिन लोगों का मल चिपचिपा या अधपचा है (आमज), उनमें इसका उपयोग कब्ज को और बढ़ा सकता है।
कितना पीना चाहिए अरंडी का तेल? :-
सामान्यतौर पर 10 से 20 मिलीलीटर अरंडी तेल का सेवन किया जा सकता है। हालांकि, खुराक तय करने के लिए व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ), उसकी समस्या और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना आवश्यक है। इसलिए डॉक्टर की देखरेख में ही अरंडी तेल का सेवन करना चाहिए।
किन लोगों को नहीं पीना चाहिए अरंडी का तेल? :-
आर्थराइटिस में यह नुकसान कर सकता है और दर्द व सूजन बढ़ा सकता है। आमज कब्ज वाले व्यक्ति लोगों को भी कैस्टर ऑइल नहीं लेना चाहिए, इसमें यह कब्ज को बढ़ा देता है। सूजन से परेशान रोगियों में अरंडी का तेल उल्टा असर कर सकता है।




























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