दुनिया की सबसे कमज़ोर मुद्रा लेबनान की लेबनानी पाउंड है। लेबनान पश्चिमी एशिया में भूमध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित एक देश है। लेबनान कई साल से आर्थिक संकट में है। सरकार की उथल-पुथल, भ्रष्टाचार, बैंकिंग व्यवस्था का गिरना और विदेशी मुद्रा खत्म होना, इन सबने लेबनानी पाउंड को दुनिया की सबसे कमज़ोर करेंसी बना दिया है।
वहीं दुनिया की दूसरी सबसे कमज़ोर मुद्रा ईरानी रियाल है। अमेरिका और कई देशों के आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान को दुनिया से लगभग काट दिया है। तेल के अलावा अर्थव्यवस्था में विविधता नहीं है, महंगाई बहुत ज़्यादा है और राजनीतिक तनाव लगातार बना रहता है, इसलिए रियाल की कीमत बेहद नीचे चली गई है। कमजोर मुद्राओं में वियतनामी डोंग भी शामिल है। हालांकि वियतनाम की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, लेकिन उनकी सरकार लंबे समय से डोंग को जानबूझकर सस्ता रखती है, ताकि निर्यात को फायदा मिले। इसलिए विनिमय दर के हिसाब से डोंग कमज़ोर दिखाई देता है।
भारत का रुपया किस नंबर पर है?
भारत का रुपया 2025 में गिरकर 90 प्रति डॉलर तक पहुंच गया है, लेकिन दुनिया में दर्जनों करेंसी इससे भी बहुत ज़्यादा कमजोर हैं। भारत का रुपया दुनिया की शीर्ष 25 सबसे कमज़ोर मुद्रा की सूची में नहीं आता है। भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। साथ ही विदेशी कर्ज, महंगाई और राजनीतिक स्थिरता के मामले में भारत की स्थिति कई देशों से कुछ ठीक है।




























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