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भक्तिभाव से परिपूर्ण वातावरण में शिष्यों-भक्तों ने मनाया सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का अवतरणदिवस

संकल्प शक्ति। 09 दिसम्बर 2025 का अतिपावन दिन, युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का अवतरण दिवस। पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम में एक विशेष ऊर्जा संचारित हो रहा था। देश-देशान्तर से पहुंचे शिष्यो-भक्तों ने प्रात:कालीन बेला में नित्यप्रति की तरह आरतीक्रम में सम्मिलित हुए। सद्गुरुदेव जी महाराज के श्रीचरणों को स्पर्श करके शिष्यों-भक्तों ने सुबह-शाम, दोनों समय अन्नपूर्णा भण्डारा परिसर में समभाव से एकसाथ बैठकर पूड़ी, राजमा की सब्ज़ी, चावल, गुलाब जामुन, छेने का रसगुल्ला आदि के रूप में भोजन प्रसाद ग्रहण करके आनन्द से विभोर थे। 

 ज्ञातव्य है कि सद्गुरुदेव जी महाराज के अवतरणदिवस पर देश के विभिन्न प्रान्तों में ज़िले, तहसील व ग्रामस्तर पर भगवती मानव कल्याण संगठन के द्वारा 24-24 घंटे व पाँच-पाँच घण्टे का श्री दुगार्चालीसा अखण्ड पाठ का आयोजन भक्ति से परिपूर्ण वातावरण में किया गया। इस पावन अवसर पर लाखों लोग पूर्णरूपेण नशामुक्त, मांसाहारमुक्त व चरित्रवान् जीवन अपनाने हेतु संकल्पित हुए।

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    देश भर में महानगरों, कस्बों व ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत स्थानों पर उक्त आयोजन को दिव्यता प्रदान करने के लिये गुरुवरश्री और  माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की संयुक्त छवि को भव्य मंच में स्थापित किया गया था, जिसे देखकर लोगों के हृदय में पवित्र भावनाएं समाहित होती चली गईं और भक्ति का ऐसा अनुपम प्रवाह उमड़ा, जिसे देखकर प्रकृति भी पुलकित हो उठी। शीतल सुगन्ध समीर के प्रवाह से रोमांचित भक्तजनों में अपूर्व चेतना का संचार हुआ और सभी के मन में सहजरूप से यह भाव उत्पन्न हुआ कि जो आनन्द ‘माँ’ की स्तुति और सात्विक जीवन में है, वह कृत्तिम जीवन में नहीं।

 देश के सैकड़ों स्थानों पर स्थापित भगवती मानव कल्याण संगठन की शाखाओं से मिली जानकारी के अनुसार, इस पावन अवसर पर सोमवार, दिनांक 08 दिसम्बर से प्रारम्भ हुये दिव्य अनुष्ठान, मंगलवार, दिनांक 09 दिसम्बर तक चलते रहे। कार्यक्रम स्थलों में सुसज्जित ‘माँ’ और गुरुवर की संयुक्त छवि को नमन् करते हुये लाखों की संख्या में भक्त जनसमुदाय ने संकल्प लिया कि वे जीवन में कभी भी नशे व मांस का सेवन नहीं करेंगे और चरित्र निर्माण तथा मानवीय मूल्यों की स्थापना के साथ धर्मरक्षा, मानवता की सेवा और राष्ट्रक्षा ही उनके जीवन का प्रमुख लक्ष्य होगा। सभी आयोजन स्थलों में कार्यक्रम का प्रारम्भ और समापन जयकारों व शंखध्वनि के साथ किया गया। 

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आत्मज्ञान प्रदाता ऋषिवर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का चिन्तन है कि ‘‘ हर कार्य में यहां तक कि किसी से बातचीत करते समय भी अपनी विवेकशीलता का परिचय दें और जो लोग विवेक से काम नहीं लेते, वे  मोह-माया, ईर्ष्या-द्वेष, क्रोध, अहंकार व विषय-विकारों से ग्रसित रहते हैं। फलस्वरूप वे बुद्धिमान होते हुए भी बुद्धिहीन की श्रेणी में गिने जाते हैं। अत: इन्द्रियसंयम की सहायता से अपने अन्दर विवेक प्रवृत्ति जाग्रत् करें और जो लोग विवेक से काम नहीं लेते वे भौतिकता के फेर में भटकते रहते हैं और उनमें यह विवेक ही नहीं उत्पन्न होता कि परमसत्त्ता माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा ही सत्य हैं और जगत् का मायाजाल मिथ्या है।’’

परम पूज्य गुरुदेव जी का चिन्तन है कि ‘‘बुद्धिमान होते हुये भी अ धिकांश लोग  न जाने क्यों आसुरी प्रवृत्ति की ओर बढ़ते चले जा हैं और अपनी सारी क्षमताओं को क्षुद्र क्रिया-कलापों में गंवाते जा रहे हैं। ईर्ष्या-द्वेष व स्वार्थ से ग्रसित मनमानीपूर्ण कार्यशैली अपनाने वाले व्यक्तियों का जीवन अन्तत: बहुत की कष्टपूर्ण होता है और जो लोग माता जगदम्बे की आराधना के साथ ही मानवता की सेवा, धर्मरक्षा व राष्ट्ररक्षा के लिए तत्पर हैं , उन्हें चैतन्यता (स्फूर्ति), बल, विद्या, बुद्धि, विवेक और निर्भयता स्वमेव प्राप्त होजाते हैं। अत: विवेकशील बनें और जिनमें अपनी इष्ट मातेश्वरी की भक्ति व ज्ञानप्राप्ति की उत्कंठा है, जिनमें नम्रता व विनयशीलता है और जो सदा बड़ों का आदर करते है तथा जिनमें अपनी इन्द्रियों को वश में करने व दुर्जनों तथा दुष्कृत्यों का त्याग करने की सामर्थ्य है, वे ही देवत्त्व और ऋषित्व के मार्ग पर बढ़कर मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं।

सद्गुुरुदेव जी महाराज ने युवाओं को संदेश दिया है कि ‘‘पूरी तरह नशामुक्त, मांसाहारमुक्त रहते हुये शादी से पहले ब्रह्मचर्य व्रत और शादी के बाद एक पति/एक पत्नि व्रत का पालन करो, धैर्यवान बनो, विनम्रता धारण करो और बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करो। यदि परमसत्ता के नियमों के अनुकूल पवित्र आचरण को धारण कर लोगे, तो परमलक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ जाओगे। ’’

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