नई दिल्ली। रेपो रेट करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए यह सिर्फ एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि ईएमआई (एटक) के बढ़ने-घटने की कुंजी है। होम लोन महंगा होगा या सस्ता, ऑटो लोन में बचत होगी या बोझ बढ़ेगा, इसका सीधा हिसाब इसी एक रेट से निकलता है, लेकिन असल में यह रेपो रेट होता क्या है? क्यों आरबीआई इसे रोज बदलता नहीं और ये आपकी जेब को इतनी जोर से क्यों झकझोर देता है?
अगर आप भी होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन चुका रहे हैं या भविष्य में लोन लेने का प्लान है, तो रेपो रेट समझना बेहद ज़रूरी है। यह सिर्फ एक फाइनेंशियल शब्द नहीं, बल्कि आपकी जेब पर असर डालने वाला अहम आर्थिक औजार है।
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर बैंक से पैसा उधार लेते हैं। जब बैंकों को कैश की कमी होती है, तो वे सरकारी बॉन्ड गिरवी रखकर आरबीआई से कर्ज लेते हैं। उस कर्ज पर आरबीआई जो ब्याज वसूलता है, वही रेपो रेट कहलाता है।





























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