Homeआयुर्वेदनीम, तुलसी, गिलोय और पुदीना के पत्ते करते हैं एन्टीवायटिक का काम

नीम, तुलसी, गिलोय और पुदीना के पत्ते करते हैं एन्टीवायटिक का काम

बीमारियों से बचने के लिए आयुर्वेद में कई फूल-पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। प्रकृति ने हमें ऐसे कई चमत्कारी पौधे दिए हैं, जिनकी ताकत आधुनिक दवाओं से भी कहीं ज़्यादा हैं। इन पत्तों में तुलसी, नीम, गिलोय, पुदीना और अजवाइन के पत्ते शामिल हैं। ये छोटे-छोटे दिखने वाले पत्ते असल में इतने ताकतवर हैं कि कई बार ये एंटीबायोटिक दवाओं से भी ज़्यादा असर करते हैं।  खास बात यह है कि इन पत्तों के साइड इफेक्ट भी नहीं होते और ये प्राकृतिक पत्ते शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं।

 तुलसी के पत्ते : तुलसी को आयुर्वेद में संजीवनी बूटी की तरह माना गया है। इसके पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। रोज सुबह खाली पेट तुलसी के कुछ पत्ते चबाने या इसका काढ़ा पीने से सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार जैसी समस्याएं दूर रहती हैं। तुलसी का सेवन इम्यूनिटी को मज़बूत करता है और शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है।

नीम के पत्ते : नीम के पत्ते कड़वे ज़रूर होते हैं, लेकिन इनमें मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीवायरल तत्त्व शरीर को अंदर से साफ करने में मदद करते हैं।  रोज सुबह नीम के 4-5 पत्तों को चबाने से त्वचा रोग, फोड़े-फुंसी, डायबिटीज और पेट के कीड़े जैसी समस्याएं दूर होती हैं। नीम का रस भी खून को साफ करता है और त्वचा को निखारने में सहायक होता है। 

गिलोय : गिलोय को अमृता भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है, अमरता देने वाली।  इसके पत्तों में एंटीआक्सीडेंट्स और एंटी-पायरेटिक गुण होते हैं, जो शरीर में जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं। गिलोय का रस बुखार, डेंगू, मलेरिया और टायफाइड जैसी बीमारियों में बहुत असरदार होता है। यह पाचन क्रिया को भी दुरुस्त करता है और लिवर को मज़बूत बनाता है।

पुदीना : पुदीना सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि सेहत सुधारने के लिए भी बहुत उपयोगी है। इसके पत्तों में मेन्थॉल नामक तत्त्व होता है, जो पाचन क्रिया को ठीक करता है और गैस, अपच, एसिडिटी से राहत दिलाता है। 

अजवाइन के पत्ते : अजवाइन के पत्ते पेट की समस्याओं के लिए किसी जादू से कम नहीं हैं। इनमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो पेट दर्द, गैस और अपच से राहत दिलाते हैं। छोटे बच्चों को भी अजवाइन का पानी दिया जाता है, ताकि उनका पेट साफ रहे और गैस की समस्या ना हो। इसकी पत्तियों का सेवन चटनी या सूप में किया जा सकता है।

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