टौरी, दमोह। सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में समाज को नशामुक्त, मांसाहारमुक्त, चरित्रवान् एवं चेतनावान् बनाने व आपसी भाईचारा स्थापित करने के साथ ही देश में व्याप्त जातिभेद, छुआछूत, साम्प्रदायिकता एवं अन्य सामाजिक बुराइयों को दूर करने के उद्देश्य से दिनांक 24-25 नवम्बर 2025 को ग्राम-टौरी, ज़िला-दमोह में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ भक्तिभाव से परिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न किया गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ में उपस्थित जनसमुदाय ने ‘माँ’-गुरुवर के जयकारे लगाकर ग्राम्य वातावरण को और सुवासित कर दिया।
समापन बेला पर भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय महासचिव और भारतीय शक्ति चेतना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन संध्या शुक्ला जी ने उपस्थित गुरुभाई-बहनों और ग्रामवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘जिस काल में स्वयं सच्चिदानंद जी भगवान् इस धरती पर आए हों, वह साधारण बात नहीं हो सकती और जो यह अनुष्ठान है, कोई साधारण अनुष्ठान नहीं है। कहा भी गया है कि कलियुग में है बस नाम आधारा। तो, प्रकृतिसत्ता के स्मरण में ही इतनी शक्ति है, माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की साधना-आराधना में इतनी शक्ति है कि हमारी सभी कामनाओं की पूर्ति हो सकती है। नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन जीते हुए नित्यप्रति अपने-अपने घरों में श्री दुर्गाचालीसा का पाठ अवश्य करें, आपके परिवार को नकारात्मकशक्तियाँ कभी परेशान नहीं करेंगी और आप सुख-शांति-संतोष का जीवन प्राप्त करेंगे।
परम पूज्य गुरुवरश्री की एक विचारधारा के माध्यम से, उनके आशीर्वाद से आज समाज में तेजी के साथ परिवर्तन आता जा रहा है और हम गुरुवरश्री की वही विचारधारा, वही ऊर्जा, वही चेतना आप लोगों के गांव में लेकर आए हैं। केवल आप लोगों को प्रकृतिसत्ता का स्मरण अपने मनमस्तिष्क में बनाए रखना है, माता भगवती की साधना-आराधना करते रहना है, ऐसी कोई समस्या नहीं, जिसका समाधान न हो सके और हमारे सद्गुरुदेव जी महाराज अपने शिष्यों को, समाज को इसी दिशा में बढ़ा रहे हैं।
भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव और भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौरभ द्विवेदी ‘अनूप भइया’ जी ने परम पूज्य गुरुवरश्री की जनकल्याणकारी और आध्यात्मिक विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए सारगर्भित शब्दों में कहा कि ‘‘ भाइयों, बहनों हर व्यक्ति का जीवन निर्धारित है, हमारा जीवन प्रारब्ध से चलता है और किसका जीवन कितना चलता है, सबकुछ सुनिश्चित है। हम प्रारब्ध का फल भोग रहे हैं, जन्मों-जन्मों के कर्मों का फल भोग रहे हैं, इसीलिए परम पूज्य गुरुदेव जी ने कहा है कि ‘इस जीवन में माता भगवती की साधना-आराधना कर लो, नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान्, चेतनावान्, पुरुषार्थी और परोपकारमय जीवन अपना लो, यह जन्म ही नहीं, अनेक जन्म सुधर जाएंगे।’
एक नास्तिक व्यक्ति के जीवन में और चेतनावान् सद्गुरु के साथ जुड़करके धर्म-कर्म करने वाले व्यक्ति में बहुत अन्तर होता है। चेतनावान् सद्गुरु के निर्देशन में चलने वाले लोगों में एक विशेष चेतना होती है, उनके चेहरों से विशेष ओज परिलक्षित होता है। और, यदि हमारे चेहरे से विशेष चेतना नहीं झलकती, चेहरा ओजपूर्ण नहीं है, हमारे व्यवहार में शालीनता नहीं है, तो समझिए कि हमारे जीवन में कुछ-न-कुछ कमी है।
परम पूज्य गुरुदेव जी के निर्देशन में सनातनधर्म की रक्षा हेतु देश को नशामुक्त कराए जाने तथा भय-भूख-भ्रष्टाचारमुक्त समाज के निर्माण हेतु भगवती मानव कल्याण संगठन के द्वारा जहाँ जगह-जगह श्री दुर्गाचालीसा के अखण्ड पाठ कराए जा रहे हैं, वहीं नशामुक्त जनजागरण पदयात्राएं निकाली जा रहीं हैं और इन यात्राओं में क्षेत्रीय जनों का बड़ी संख्या में शामिल होना, निश्चित ही जनजागरूकता का संकेत है। सभी चाहते हैं कि उनका गांव, उनका ज़िला, उनका प्रदेश पूरी तरह नशामुक्त हो और जब सभी नशामुक्त होंगे, तभी तो देश के विकास का पथ प्रशस्त होगा। बस मैं यही चाहता हूँ कि संगठन के कार्यकर्ता इसी तरह समाज के बीच दिव्य अनुष्ठान कराते रहें, जनजागरण करते रहें, परिवर्तन सुनिश्चित है।’’




























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