भारतीय खेती धीरे-धीरे व्यवसाय का रूप ले रही है, जो खाद पहले किसानों को आसानी से उपलब्ध हो रहा था। एक समय था जब हर किसान के घर के गोबर खाद हुआ करता था, लेकिन समय के साथ पशुओं का पालना कम हुआ नतीजतन समय के साथ किसानों की निर्भरता रासायनिक उर्वरकों पर होने लगी और रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे। ऐसे में किसानों ने फिर से जैविक खाद की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। यह बात एक उन्नत किसान पहले ही भाप चुका था। ऐसे में पिता-पुत्र ने जैविक खाद का ही व्यापार शुरू कर दिया। अब वह इसे बेचकर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं।
बालाघाट के बगड़मारा के रहने वाले जियालाल राहंगडाले ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे प्रहलाद राहंगडाले के साथ मिलकर जैविक खाद का बिजनेस शुरू कर दिया। किसान ने बताया कि हमारे पुरखों से ही जैविक खाद बन रहा है, लेकिन जब लोग रासायनिक खेती की तरफ जा रहे थे, तब वह ठहर गए और जैविक खादों का ही इस्तेमाल किया। अब जैसे-जैसे डिमांड आने लगी वैसे-वैसे खाद को बेचा जाने लगा। अगर नहीं भी बिकता है, तो अपने ही खेती में इसका इस्तेमाल कर लेते हैं।
एक गाय के गोबर से 30 एकड़ की खेती
किसान ने बताया कि अगर जैविक खेती करना है, तो एक गाय पालना ही काफी है। ऐसे में जैविक खाद बनाने के लिए गोबर के साथ खेत के अपशिष्ट का इस्तेमाल कर जैविक खाद बनाया जा सकता है। इसके अलावा जीवामृत बनाने के लिए 10 किलोग्राम गोबर की ज़रूरत पड़ती है। वहीं, वर्मी कम्पोस्ट के लिए गोबर के साथ पराली का इस्तेमाल कर सकते हैं और खेती से निकलने वाले दूसरे अपशिष्टों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में वर्मी कंपोस्ट खाद तेजी से बनाना है, तो केंचुए की संख्या बढ़ानी चाहिए। जियालाल राहंगडाले बताते हैं कि वह वर्मी कंपोस्ट सहित जैविक कीटनाशक, जीवामृत, नीमास्त्र जैसे जैविक खादों को बेचते हैं।



























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