कलियुग में महाभारतकाल के पांडवों ने कार्तिक मास की शुक्ल पंचमी तिथि को अलग-अलग राजाओं के यहाँ जन्म लिया था। अत: इस तिथि को पांडव पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है।
भविष्य पुराण के अनुसार पांडवों ने कलियुग में भी अलग-अलग राजाओं के यहाँ जन्म लिया था। युधिष्ठिर का जन्म वत्सराज नाम के राजा के पुत्र के रूप में हुआ। उनका नाम मलखान था। भीम का जन्म वीरण नाम से हुआ, जो वनरस नाम के राज्य के राजा बने। अर्जुन का जन्म परिलोक नाम के राजा के यहां हुआ और उनका नाम ब्रह्मानन्द था। नकुल का जन्म कान्यकुब्ज के राजा रत्नभानु के यहां हुआ, उनका नाम लक्ष्मण था। सहदेव ने भीमसिंह नामक राजा के घर में देवीसिंह के नाम से जन्म लिया। जबकि, दानवीर कर्ण ने तारक नाम के राजा के रूप में जन्म लिया।
कहते हैं कि धृतराष्ट्र का जन्म अजमेर में पृथ्वीराज के रूप में हुआ और द्रोपदी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, जिसका नाम वेला था




























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