Homeविविध समाचारशिक्षकों के सम्मान के प्रति समर्पित है राष्ट्रीय शिक्षक दिवस

शिक्षकों के सम्मान के प्रति समर्पित है राष्ट्रीय शिक्षक दिवस

राष्ट्रीय शिक्षक दिवस, भारतरत्न से सम्मानित देश के पूर्व राष्ट्रपति और शिक्षाविद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती पर उन्हें स्मरण करते हुए हर साल 05 सितम्बर को मनाया जाता है।

इस वर्ष 2025 में हम 64वां राष्ट्रीय शिक्षक दिवस और सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की 136वीं जयंती मना रहे है।  

 इतिहास 

वर्ष 1962 से ही हर साल 05 सितंबर को सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत राधाकृष्णन जी के राष्ट्रपति बनाने के बाद उनके विद्यार्थियों और मित्रों के अनुरोध करने पर हुई कि वे सब 05 सितंबर को, उनके जन्मदिन को जश्न के रूप में मनाना चाहते है। इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने कहा कि मुझे उस समय ज़्यादा खुशी होगी और मैं गर्व महसूस करूंगा, अगर मेरे जन्मदिन को भारत के शिक्षकों के लिए शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। वह अपने जन्मदिन को सभी शिक्षकों के सम्मान के प्रति समर्पित करना चाहते थे और यह एहसास दिलाना चाहते थे कि शिक्षकों का इस दुनिया में कितना ज़्यादा महत्त्व होता है।

राधाकृष्णन कौन थे?

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी भारत के प्रसिद्ध शिक्षक, बड़े विद्वान, गहरी सोच व विश्वास वाले व्यक्ति होने के साथ ही भारतीय संस्कृति के संवाहक, एक महान दार्शनिक और प्रख्यात शिक्षाविद भी थे। उनका जन्म तमिलनाडु के चित्तूर ज़िले के तिरुतनी गाँव में 05 सितंबर 1888 को हुआ था। वह देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें1954 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से भी सम्मानित किया जा चूका है।

शिक्षक का महत्त्व  

किसी भी व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है, शिक्षक समाज के उन आदर्श व्यक्तियों में से एक है,  जिनके कंधों पर देश के भविष्य को उज्जवल बनाने का दारोमदार होता है। एक अच्छा शिक्षक ही एक सभ्य समाज का निर्माता हो सकता है।

     अध्यापकों का हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान होना चाहिए, क्योकि हमारी जिंदगी को सही आकार देने में इनका बहुत बड़ा हाथ है। वे गुरु ही है, जो हमें अनुशासित जीवन जीना सिखाते है, जिससे हम सही-ग़लत में भेद कर पाते हैं। अपने गुरु या अध्यापकों से मिली शिक्षा के कारण ही हमारा मार्गदर्शन होता है और हम एक सभ्य और संपूर्ण मनुष्य बनते हैं। उनके द्वारा दिए गए ज्ञान रूपी प्रकाश से ही हम समाज के अंधकार को दूर कर सकते हैं।

संबंधित खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

आगामी कार्यक्रमspot_img

Popular News