बायोगैस प्लांट एक ऐसा ढांचा होता है, जो आमतौर पर दो भागों में बंटा होता है। पहला डाइजेस्टर टैंक, जिसमें कचरा सड़ता है और दूसरा गैस स्टोरेज यूनिट, जहां गैस इकट्ठा होती है। कुछ बायोगैस प्लांट बहुत छोटे होते हैं, जिन्हें घर में भी लगाया जा सकता है और कुछ बड़े होते हैं जो गांव या कॉलोनी के कई घरों के लिए गैस बनाते हैं।
आज के समय में बिजली, ईंधन व गैस की ज़रूरत हर घर में होती है। रसोई में खाना पकाने से लेकर स्कूल व अस्पतालों में बिजली जलाने तक, ऊर्जा हमारे जीवन का ज़रूरी हिस्सा है। हम यह ऊर्जा प्रकृति से भी पा सकते हैं? ऐसा ही एक तरीका है — बायोगैस।
बायोगैस क्या है?
बायोगैस एक तरह की गैस होती है, जो गाय के गोबर, रसोई के बचे हुए जैविक कचरे, पत्तों और अन्य सड़ने वाले पदार्थों से बनाई जाती है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है, जो जलने पर तेज ऊर्जा देती है। इसे जलाकर हम खाना बना सकते हैं, पंखा चला सकते हैं और यहां तक कि बिजली भी पैदा कर सकते हैं।
कैसे बनती है बायोगैस?
बायोगैस बनाने की प्रक्रिया को जैव अपघटन कहते हैं। इसमें बैक्टीरिया आॅक्सीजन के बिना जैविक पदार्थों को सड़ाते हैं। यह प्रक्रिया विशेष बायोगैस टैंक (डाइजेस्टर) में होती है। पहले गोबर व जैविक कचरे को इकट्ठा करते हैं। पानी मिलाकर एक घोल बनाते हैं जिसे एक बंद टैंक में डाला जाता है, जहां यह कुछ दिनों तक सड़ता है। सड़ने पर मीथेन, कार्बन डाइआक्साइड और थोड़ी मात्रा में अन्य गैस बनती हैं। यह गैस ऊपर एक पाइप से बाहर आती है और इसका उपयोग किया जा सकता है।



























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