अयोध्या भगवान् राम की जन्मस्थली है। पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि त्रेतायुग में भगवान् राम ने अयोध्या में जन्म लिया था। 14 वर्ष के वनवास और लंका विजय के बाद श्रीराम अयोध्या आए और करीब 11 हज़ार वर्षों तक राज किया था। लेकिन इस बात को आप शायद ही जानते हों कि प्रभु राम से पहले अयोध्या भगवान् विष्णु की तपोस्थली रह चुकी है। उन्होंने कुछ साल अयोध्या में तप किया था।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, त्रेतायुग से पहले सतयुग में भगवान् विष्णु तप के लिए अयोध्या को चुना था। स्कंद पुराण में दिया गया है कि एक बार देवताओं और राक्षसों में लड़ाई हुई और राक्षसों ने हाहाकार मचा दिया था। तब देवता भगवान् विष्णु से सहायता मांगने पहुंचे। उस समय भगवान् विष्णु ने देवताओं को आश्वासन दिया कि मैं राक्षसों से बचाने के लिए मदद करूंगा। इतना कहकर भगवान विष्णु अंतर्ध्यान होगए और गुप्त रूप से अयोध्या पहुंचे तथा यहां गुप्तहरी तीर्थ में वर्षों तपस्या की। उनके तप से जो तेज प्रकट हुआ, वह उन्होंने देवताओं को प्रदान किया और उस तेज से देवताओं ने राक्षसों का संहार किया। कहा जाता है कि अयोध्या में गुप्तहरि तीर्थ के समान न कोई तीर्थ था और न ही भविष्य में होगा। गुप्तहरि तीर्थ को ही गुप्तार घाट भी कहा जाता है। भगवान् विष्णु के गुप्त रूप से तपस्या करने के कारण इस स्थान का नाम गुप्तहरि तीर्थ पड़ा।



























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