Homeआयुर्वेदऊर्जा और ठंडक का देसी नुस्खा ‘सत्तू का शरबत’

ऊर्जा और ठंडक का देसी नुस्खा ‘सत्तू का शरबत’

गर्मी की तपती दोपहर में जब शरीर थकान से चूर हो जाए, तब एक गिलास ठंडा सत्तू का शरबत पीने का मजा ही अलग है। बिहार और उत्तरप्रदेश की गलियों से निकलकर यह देसी ड्रिंक आज देशभर में अपनी धूम मचा रहा है। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर सत्तू का शरबत न सिर्फ ऊर्जा देता है, बल्कि शरीर को ठंडक भी पहुँचाता है। तो आइए, जानते हैं कि सत्तू का शरबत क्यों है इतना खास और कैसे यह आपकी गर्मी को मजेदार बना सकता है!

प्रोटीन और फाइबर का खजाना

सत्तू, जो भुने हुए चने को पीसकर बनाया जाता है, प्रोटीन और फाइबर का पावरहाउस है। एक गिलास सत्तू के शरबत में लगभग 15 ग्राम प्रोटीन और 5 ग्राम फाइबर होता है, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। सत्तू का शरबत गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाता है और पेट को भरा हुआ रखता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो वजन कम करना चाहते हैं।

ऊर्जा का बूस्टर

सत्तू का शरबत पीते ही शरीर में एक नई स्फूर्ति आ जाती है। इसमें मौजूद काबोर्हाइड्रेट्स और प्रोटीन मांसपेशियों को ताकत देते हैं, जिससे यह मजदूरों, किसानों और स्टूडेंट्स के बीच खासा लोकप्रिय है। सत्तू का शरबत सस्ता भी है और एनर्जी तुरंत देता है।

ठंडक का एहसास 

सत्तू का शरबत शरीर को ठंडा रखने में भी कमाल करता है। गर्मी में लू से बचने के लिए यह एक प्राकृतिक उपाय है। इसमें नमक, नींबू और पुदीना डालकर इसे और रिफ्रेशिंग बनाया जा सकता है। सत्तू का शरबत शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है और पेट की गर्मी को शांत करता है। यह गर्मी में सबसे अच्छा नेचुरल कूलेंट है।

स्वाद का तड़का

सत्तू का शरबत बनाने के दो तरीके हैं-नमकीन और मीठा। नमकीन सत्तू शरबत में नमक, भुना जीरा और नींबू का रस डाला जाता है, जबकि मीठे शरबत में गुड़ या चीनी मिलाई जाती है। कुछ लोग इसमें काला नमक और पुदीना डालकर स्वाद को दोगुना कर देते हैं।

सत्तू शरबत बनाने की आसान रेसिपी

2 बड़े चम्मच सत्तू को एक गिलास ठंडे पानी में मिलाएँ।

स्वादानुसार नमक या गुड़ डालें।

चुटकीभर भुना जीरा पाउडर और नींबू का रस डालकर अच्छे से मिलाएँ।

धनिया, पुदीने की पत्तियाँ डालकर ठंडा-ठंडा पियें।

सावधानी भी जरूरी

सत्तू का शरबत भले ही सेहतमंद हो, लेकिन इसे ज्यादा पीने से पेट फूल सकता है। दिन में 1-2 गिलास सत्तू शरबत काफी है। इसे हमेशा ताजा बनाकर पिएँ और साफ पानी का इस्तेमाल करें।

कार्यकारी संपादक

डॉ. बृजपाल सिंह चौहान 

(एन. डी.) नेचुरोपैथी 

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