नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल अपराधों, बैंकिंग धोखाधड़ी और एआई जनित डीपफेक के ख़तरों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा क़दम उठाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त तत्त्वावधान में जल्द ही एक उच्चस्तरीय ‘राष्ट्रीय डिजिटल सुरक्षा बोर्ड’ का गठन किया जाएगा।
नई दिल्ली में विगत दिवस आयोजित मुख्यमंत्रियों और राज्यों के पुलिस महानिदेशको के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय गृहमंत्री ने इस नई व्यवस्था की रूपरेखा देश के सामने रखी। यह बोर्ड सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी में काम करेगा और इसका मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों को ऑनलाइन सुरक्षा प्रदान करना तथा अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करना होगा।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में राष्ट्रीय राजधानी सहित पूरे देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’, एआई वॉयस क्लोनिंग (आवाज की नकल कर पैसे ऐंठना) और फर्जी निवेश ऐप्स के जरिए हजारों करोड़ रुपये की ठगी के मामले सामने आए हैं। नया बोर्ड एक केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा, जहाँ सभी राज्यों की साइबर सेल, केंद्रीय जांच एजेंसियां और वित्तीय संस्थान एक ही प्लेटफॉर्म पर रीयल-टाइम डेटा साझा करेंगे।
ठगी का शिकार होने पर नागरिक तत्काल इस बोर्ड की हॉटलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जिससे ठगी की रकम को बैंक खातों में ही तुरंत फ्रीज किया जा सके।
एआई डिटेक्शन विंग
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले फर्जी और भ्रामक डीपफेक वीडियो की पहचान करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय समन्वय
डार्कवेब और विदेशी धरती (जैसे म्यांमार, कंबोडिया या दुबई) से संचालित होने वाले भारतीय विरोधी साइबर सिंडिकेट पर नकेल कसने के लिए यह बोर्ड अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा।
कड़े दंड का प्रावधान
बोर्ड के पास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और टेलीकॉम कंपनियों को नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाने और संबंधित नोडल अधिकारियों को तलब करने का सीधा अधिकार होगा।





























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