नई दिल्ली। देश में अमीरी-गरीबी की खाई गहरी होती ही जा रही है। भारत में बढ़ती आर्थिक असमानता की इस खाई को पाटने के लिए अमीरों पर अलग से टैक्स लगाने की मांग तेजी पकड़ती जा रही है। एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि ज़्यादातर भारतीय लोग अमीरों पर सुपर रिच टैक्स लगाए जाने के पक्षधर हैं। अर्थ फोर ऑल और ग्लोबल कॉमन्स अलायंस की ओर से जी-20 देशों के 22,000 से अधिक लोगों पर किए गए एक सर्वे में कहा गया कि 74 प्रतिशत भारतीय मानते हैं कि आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए अमीरों पर सुपर रिच टैक्स लगाना उचित है। यानी हर चार में से तीन भारतीय सुपर रिच टैक्स लगाए जाने के समर्थन में हैं। जी-20 देशों में ऐसे लोगों का हिस्सा 68 प्रतिशत है। भारतीयों का मानना है कि ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वालों से ज़्यादा टैक्स वसूले जाने चाहिए।
दो प्रतिशत लगे अतिरिक्त वेल्थ टैक्स
जी-20 के मौजूदा अध्यक्ष ब्राजील का लक्ष्य अमीरों पर कराधान को लेकर आम सहमति बनाना है। जुलाई में जी-20 के वित्त मंत्रियों की बैठक में इस बारे में एक संयुक्त घोषणा पर जोर दिए जाने की संभावना है। फ्रांसीसी अर्थशास्त्री गैब्रियल ज़ुकमैन जल्द इस बारे में एक रिपोर्ट पेश करेंगे कि कैसे बेहद अमीर लोगों पर वैश्विक स्तर पर न्यूनतम टैक्स काम करेगा और इसे कितना बढ़ाया जा सकता है। ब्राजील के इस टैक्स प्रस्ताव के पीछे जुकमैन का ही दिमाग है। जुकमैन का कहना है कि बेहद अमीर लोगों पर 02 प्रतिशत अतिरिक्त वेल्थ टैक्स लगाना चाहिए।
81 प्रतिशत भारतीय चाहते हैं ये बदलाव
81 प्रतिशत भारतीयों ने कल्याणकारी अर्थव्यवस्थाओं में बदलाव का समर्थन किया है, ऐसी अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक वृद्धि के बजाय स्वास्थ्य और पर्यावरण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाता है। 71 प्रतिशत भारतीय चाहते हैं देश में हो यूनिवर्सल बेसिक इनकम यानी सभी के लिए समान आय की व्यावस्था। 76 प्रतिशत भारतीय चाहते हैं बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और 74 प्रतिशत की चाहत कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए लोगों को हेल्दी डाइट मिले। 68 प्रतिशत भारतीयों का मानना है कि अगले एक दशक में बिजली, सड़क-ट्रासपोर्ट, रियल एस्टेट सहित सभी सेक्टर्स में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की ज़रूरत है।





























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