नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के द्वारा ‘बाल संरक्षण माह’ के तहत चलाए गए व्यापक जांच अभियान में यह बात सामने आई है कि भारी-भरकम फीस वसूलने वाले प्राइवेट स्कूल, बच्चों को सुरक्षित माहौल देने में सरकारी स्कूलों से भी पीछे छूट गए हैं। अभियान के दौरान जांचे गए कुल स्कूलों में से निजी स्कूलों में सुरक्षा संबंधी खामियों का आंकड़ा सबसे डराने वाला है।
उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कड़े निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग, दिल्ली पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीमों ने राजधानी के 1,677 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। इस जांच में कुल 774 स्कूल सुरक्षा मानकों पर फेल पाए गए हैं।
निजी स्कूलों का हाल: जांच टीमों ने 812 प्राइवेट स्कूलों का दौरा किया, जिनमें से 463 निजी स्कूलों में बाल सुरक्षा से जुड़ी बेहद गंभीर कमियां पाई गईं। सरकारी स्कूलों की स्थिति: 790 सरकारी स्कूलों की जांच की गई, जिसमें से 270 स्कूलों में खामियां मिलीं। इसके अलावा 75 सहायता प्राप्त स्कूलों में से 41 में सुरक्षा उल्लंघन पाए गए। आंकड़ों का यह विश्लेषण साफ दिखाता है कि सरकारी स्कूलों की तुलना में प्राइवेट स्कूलों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी का अनुपात अधिक है।





























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