सावन महीना चल रहा है और इस बार ये महीना 31 अगस्त तक है। इस महीने में ज्योतिर्लिंग के साथ ही शिव जी के पौराणिक महत्त्व वाले मंदिरों में दर्शन और पूजन करने की परंपरा है। उत्तराखंड में शिव जी के 05 प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें पंच केदार के नाम से जाना जाता है। इन पांच मंदिरों में केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मद्यमहेश्वर और कल्पेश्वर महादेव शामिल है।
पंच केदार के पाँच में से चार मंदिर शीतकाल के लिए करीब छह महीने बंद रहते हैं, सिर्फ कल्पेश्वर महादेव मंदिर में भक्त सालभर दर्शन कर सकते हैं। अभी ये पाँचों मंदिर भक्तों के लिए खुले हुए हैं।
पंच केदार से जुड़ी पौराणिक कथा
प्रचलित कथाओं के मुताबिक, द्वापर युग में महाभारत युद्ध के बाद पांचों पांडव युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव द्रौपदी के साथ हिमालय की ओर आए थे। सभी पांडव अपने पापों से मुक्ति चाहते थे, इसलिए पांडवों ने यहां शिव जी को प्रसन्न करने के लिए तप किया था। पांडवों के तप से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए थे। पांडवों के दर्शन देने के बाद शिव जी इस क्षेत्र में एक बैल के रूप में गायब हो गए। बाद में उनके धड़ का ऊपरी हिस्सा काठमांडू में दिखाई दिया। अब उस स्थान पर पशुपतिनाथ मंदिर है। शिव जी की भुजाएं उत्तराखंड के तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मध्यमहेश्वर में, बाल कल्पेश्वर में और केदारनाथ में बैल के कूबड़ के रूप में पूजा की जाती है।
तुंगनाथ मंदिर
तुंगनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जि़ले में है। शिवजी के सभी मंदिरों में ये मंदिर सबसे ऊंचाई पर स्थित है। तुंगनाथ महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग जि़ले में करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां का प्राकृतिक वातावरण मंदिर की खासियत है।




























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