योग और धर्म का समन्वय नितान्त आवश्यक है। कुछ लोग योग को अलग मानते हैं और कुछ लोग योग को केवल बीमारियों के निदान का साधन मानते हैं, चूँकि उनको योग के पूर्णत्त्व का ज्ञान नहीं है कि योग के पूर्णत्त्व का स्वरूप क्या है? भटकाव केवल इतना है। योग का तात्पर्य केवल उछलकूद करना या कुछ आसन, व्यायाम, कपालभाति, अनुलोम-विलोम ही नहीं है, बल्कि योग का तात्पर्य है ‘आत्मा को परमसत्ता से जोड़ना तथा शरीर, मन और श्वासों पर नियन्त्रण प्राप्त करना।’




























Views Today : 4
Views Last 7 days : 269
Views Last 30 days : 851
Views This Year : 3345
Total views : 103818
Who's Online : 0
Your IP Address : 216.73.216.139