महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर हिन्दूधर्मावलम्बी व्रत रखकर भगवान् शिव की स्तुति करते हैं और जलाभिषेक करते हैं, ताकि उनके ऊपर भगवान भोलेनाथ की कृपा के फूल बरसें, उनकी मनोकामनाएं पूरी हों। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फ़रवरी, दिन रविवार को मनाई जाएगी।
क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्रि पर्व?
शिव पुराण के अनुसार, फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान् भोलेनाथ पहली बार दिव्य लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। भगवान् ब्रह्मा जी और भगवान् विष्णु जी में कौन बड़ा है? इसका उत्तर महादेव ने स्वयं को दिव्य लिंग स्वरूप में प्रकट करके दिया था, जिसका न कोई प्रारंभ था और न ही अंत, जिससे दोनों को देवताओं को महादेव के विशाल रूप का पता चला, इससे पूर्व वे निराकार थे।
कुछ लोग कहते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान् शिव का विवाह हुआ था, इस वजह से महाशिवरात्रि मनाई जाती है. लेकिन प्रमाणों के अनुसार यह बात ग़लत है। पहली बार भगवान् शिव का विवाह सती से हुआ और दूसरी बार देवी पार्वती से हुआ।
शिवपुराण के रुद्र संहिता के दूसरे खंड के 18वें अध्याय में बताया गया है कि सती से विवाह के लिए शिव बारात चैत्र माह के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि, दिन रविवार को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में निकली थी, वहीं शिव पुराण में बताया गया है कि रोहिणी युक्त चंद्रमा, मार्गशीर्ष माह में सोमवार के दिन दोषरहित मुहूर्त में शिव जी का विवाह पार्वती जी से हुआ था।
महाशिवरात्रि व्रत पूजा का महत्त्व
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने से सद्इच्छाएं पूरी होती हैं और शिवकृपा से सभी कष्ट, रोग, दोष, संताप मिट जाते हैं।





























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