मुंबई। महाराष्ट्र में हुए 58 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट घोटाले को लेकर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। ढाई हज़ार पन्नों की इस चार्जशीट में महाराष्ट्र नोडल साइबर पुलिस ने कई बड़ी चीजों का खुलासा किया है। इसमें 32 गिरफ्तार लोगों सहित फरार चल रहे 41 आरोपियों के भी नाम दर्ज हैं। साथ ही बताया गया है कि फ्रॉड से कमाया यह पैसा कैसे विदेशों में भेजा गया और भारत से बाहर बैठे मास्टरमाइंड ने ही इसे आपरेट किया?
चार्जशीट में बताया गया है कि फ्रॉड करने वाले ये लोग सीबीआई और ईडी के अधिकारी बनकर लोगों को डराते थे और पैसों को इधर-उधर भेजने के लिए फर्जी बैंक खातों का जाल बनाते थे। यह पैसा अलग-अलग राज्यों से होकर आखिर में विदेश भेजा जाता था। जांच में फ्रॉड के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल करने के लिए 10 हज़ार से ज्यादा फर्जी यानि म्यूल बैंक खाते सामने आए हैं।
जानकारी में बताया गया है कि इनमें से कई खाते नकली कंपनियों के नाम पर, जाली केवाईसी दस्तावेज और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करके खोले गए थे। पैसा करीब 13 स्तरों के खातों से होकर गुजरा था। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के कम से कम 27 सक्रिय फर्जी खाते शामिल थे, जिसके बाद पैसा विदेश भेज दिया गया। इस गिरोह के सरगना कंबोडिया और दुबई से काम कर रहे थे। विजय खन्ना नाम का एक व्यक्ति इस रैकेट का मुख्य हैंडलर बताया जा रहा है, जो भारत से बाहर रहकर ही इस पूरे नेटवर्क को आपरेट कर रहा था।




























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