महाशिवरात्रि भारतीयों का एक प्रमुख त्यौहार है। माघ फागुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन भगवान् शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन भगवान् शिव व उनकी पत्नी पार्वती की पूजा होती हैं। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्त्वपूर्ण माना जाता है। महाशिवरात्रि से सम्बन्धित एक और पौराणिक कथा है, जो इस प्रकार है।
समुद्र मन्थन
समुद्र मन्थन अमृत प्राप्त करने के लिए किया गया, लेकिन इसके साथ ही हलाहल नामक विष भी पैदा हुआ। हलाहल विष में ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की क्षमता थी, जिसे केवल भगवान् शिव ही इसे नष्ट कर सकते थे। शिव ने हलाहल नामक विष को अपने कण्ठ में रख लिया था। ज़हर इतना शक्तिशाली था कि शिव जी अत्यधिक दर्द से पीडि़त हो उठे और उनका गला नीला हो गया था। इस कारण से वे नीलकण्ठ के नाम से प्रसिद्ध हैं। उपचार के लिए, चिकित्सकों ने देवताओं को भगवान् शिव को रात भर जगाये रहने की सलाह दी। शिव को आनंदित करने और जागाये रखने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाये और उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान् शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। महाशिवरात्रि इस घटना का उत्सव है, जिससे शिव ने दुनिया को बचाया। तब से इस दिन, भक्त उपवास करते है।





























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