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बाहर की ओर मत दौड़ो, बल्कि अपने अन्तरतम में जाने का प्रयास करो

संकल्प शक्ति || सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से दिनांक 6-7 फ़रवरी 2026 को भैंसासुर बब्बा प्रांगण, दमोह रोड, तहसील-तेन्दूखेड़ा, ज़िला-दमोह में 24 घंटे का श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ सम्पन्न किया गया।

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 दिव्य अनुष्ठान की समापन बेला पर भारतीय शक्ति चेतना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न संध्या शुक्ला जी ने उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए प्रभावशील शब्दों में कहा कि ‘‘अव्यवस्थित जीवन होजाए, तो उसे व्यवस्थित करने का, मन में अशान्ति उत्पन्न होजाए, तो मन में शान्ति लाने का इससे अच्छा और कोई तरीका हो ही नहीं सकता। ‘माँ’ की साधना से, ‘माँ’ की आराधना से सुख-शांति-समृद्धि तो मिलती ही है, आप भक्ति के मार्ग पर बढ़ते हैं, धर्म के मार्ग पर बढ़ते हैं, सत्कर्म के मार्ग पर बढ़ते हैं। इस दुर्गाचालीसा पाठ के माध्यम से आप जान भी नहीं पाते और ‘माँ’ की कृपा प्राप्त होजाती है।

  बाहर की ओर मत दौड़ो, बल्कि अपने अन्तरतम में जाने का प्रयास करो और आकलन करो कि मैं ऐसा कौन सा कार्य करूं, जिससे कि मेरे और प्रकृतिसत्ता के बीच की दूरी कम होजाएं? वह कौन सा मार्ग हो सकता है, जिस पर चलकर मैं प्रकृतिसत्ता के चरणों तक पहुंच सकूं? और जो आपकी आत्मा कहती हो, उस पथ पर आगे बढ़ जाओ और यदि यह आभाष होजाए कि यह कार्य मुझे प्रकृतिसत्ता के चरणों से दूर कर देगा, तो उस कार्य से अलग हट जाओ।  तात्पर्य हमारे जिस कार्य से किसी को पीड़ा पहुंचती है, वह अधर्म है, अत: उस कार्य से दूरी बना लें। हर पल आकलन करें कि मेरे द्वारा जो कार्य किए जा रहे हैं, वे धर्मरक्षा के लिए हैं या नहीं, राष्ट्ररक्षा के लिए हैं या नहीं, मानवता के हित में हैं या नहीं और अपने आपको सत्यधर्म के मार्ग पर बढ़ाते चले जाएं। यही ज्ञान तो हमें परम पूज्य गुरुदेव जी ने दिया है।’’

 भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष शक्तिस्वरूपा बहन सिद्धाश्रमरत्न पूजा शुक्ला जी ने भक्तिभाव से आल्हादित स्वर में कहा कि ‘‘परम पूज्य सद्गुरुदेव जी महाराज ने आप सभी लोगों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया है। यदि आप अपना कल्याण चाहते हैं, आशीर्वाद चाहते हैं, तो जनकल्याण को प्राथमिकता दें, तभी आप गुरुवरश्री से आत्मकल्याण की प्रार्थना कर सकते हो। तो, गुरुदेव जी ने हमें वह मार्ग दिया है कि हम किस तरह पूर्ण आशीर्वाद के पात्र बन सकते हैं? 

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  परम पूज्य गुरुवर कहते हैं कि ‘आप लोग अपने घर में रामायण पढ़ो, गीता पढ़ो, मना नहीं किया गया है, लेकिन समाज में नाना प्रकार के कथा, प्रवचन के कार्यक्रम होते रहते हैं, वहाँ जाने से मना इसलिए किया जाता है कि वहाँ ज्ञान नहीं मिलता, बल्कि कथा के नाम पर नाच-रास-रंग की महफिल जमती है। अत: भटको नहीं, अपने विवेक को जाग्रत् करो कि तुम्हारे लिए क्या उचित है और क्या अनुचित है? यदि हमें ‘माँ’ की, अपने इष्ट की कृपा प्राप्त करनी है, तो तप, त्याग के मार्ग पर चलना पड़ेगा। कथावाचकों के द्वारा करवाए जा रहे नाच-रास-रंग के कार्यक्रमों से कुछ नहीं मिलने वाला।’

  आप चाहे सुख में हों, या दु:ख में, हर स्थिति में ‘माँ’-गुरुवर को याद करते रहें, उन्हें अपने हृदय में बसाकर रखें। चाहे कितनी ही बड़ी कठिनाई क्यों न आ जाए, कर्मपथ से कभी विचलित मत होना, ‘माँ’-गुरुवर जल्द ही उस कठिनाई से बाहर निकाल लेंगे और आपको पता भी नहीं चलेगा।’’

भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न सौरभ द्विवेदी ‘अनूप’ जी ने उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘कुछ नास्तिक लोग कहते हैं कि बहुत पूजा-पाठ करते हो, सिद्धियां मिलीं कि नहीं! इस कलियुग में इसे ही सिद्धि मान लीजिए कि यहाँ पर कई हज़ार लोग नशे-मांसहार से मुक्त और चरित्रवान् जीवन जीने वाले बैठे हैं और कोई बता दे कि अन्य कहीं किसी भी आयोजन में एक हज़ार लोग भी नशामुक्त होकर उपस्थित होते हों! परम पूज्य गुरुवरश्री का सान्निध्य पाने से हमें यह सिद्धि मिली है कि हमें सभी नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् व चेतनावान् जीवन प्राप्त हुआ है। जिस घर में एक भी व्यक्ति यदि नशा करता हो, तो जाकर देखिए कि उस घर की कैसी दुर्दशा है? नशेड़ी व्यक्ति जब नशा करके घर पहुंचता है, तो अपने बच्चों को पीटता है, पत्नी को प्रताड़ित करता है, अपने माता-पिता का अपमान करता है। नित्यप्रति उस घर में कलह का वातावरण निर्मित रहता है। 

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  इसीलिए सद्गुुरुदेव जी महाराज से जब कोई जुड़ना चाहता है, गुरुदीक्षा प्राप्त करना चाहता है, तो सबसे पहले गुरुदेव जी नशामुक्ति का संकल्प करवाते हैं। हमारे धर्मग्रन्थों में लिखा है कि ‘नशा करना महापाप है।’ नशा करने वाला कभी धर्मपथ पर चल ही नहीं सकता और अगर धर्म के रास्ते पर चलना है, तो सबसे पहले नशा छोड़ना होगा। नशे-मांसाहार व चरित्रहीनता के बाद एक और महामारी है, जातपात व छूआछूत की महामारी। इसे भी समाज से दूर करने में भगवती मानव कल्याण संगठन विगत 30 वर्षों से प्रयत्नशील है, लेकिन केन्द्र सरकार ने यूजीसी क़ानून का बखेड़ा करके एकता के सूत्र में बंध चुके सनातनियों को खण्ड-खण्ड कर देना चाहती है। वही अंग्रेज़ों की नीति कि ‘फूट डालो और राज करो।’ भले ही यूजीसी क़ानून को लेकर कुछ स्थानों पर आपसी वैमनस्यता पनपी हो, लेकिन भगवती मानव कल्याण संगठन से सभी जातियों के लाखों-लाख लोग जुड़े हैं, वे आज भी एक साथ भजन करते हैं, एकसाथ भोजन करते हैं, उनके बीच कोई अलगाव की भावना उत्पन्न नहीं हुई। गुरुदेव जी महाराज के आशीर्वाद से हमें यह सिद्धि मिली है। कहीं नहीं लिखा है, किसी भी वेद, पुराण, धर्मग्रन्थों में नहीं लिखा है कि कोई अछूत है, लेकिन सरकार है कि वर्गविभेद करके समाज को लड़वाना चाहती है।

  परम पूज्य सद्गुरुदेव सनातनधर्म को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए सभी जाति, धर्म, सम्प्रदाय के लोगों को एक रीति की ओर लेजा  रहे हैं कि एकसमान हमारा धर्म होना चाहिए, एकसमान हमारे कर्म होने चाहिए। हम साथ में बैठकर भजन करें, हम साथ में बैठकर भोजन करें और कोई जातपात, छुआछूत की बात न हो; सभी नशामुक्त हों, सभी मांसाहारमुक्त हों, सभी चरित्रवान् हों। यूजीसी मामले में सरकार ने केवल अपना फायदा देखा और सभी को लड़ाने का कार्य किया है। मैं यही कहना चाहता हूँ कि जातपात, भेदभाव, छुआछूत की खाई को भगवती मानव कल्याण संगठन मिटा चुका है, उस खाई को पुन: मत खोदो। आप लोग किसी की चाल में न फसें, अपने घर में साधना करें और बाहर निकलें तो जनजागरण के लिए कन्धे से कन्धा मिलाकर चलें। अच्छा भोजन करिए, स्वस्थ रहिए, मिलजुलकर रहिए और एकात्मभाव से कर्मपथ पर बढ़ते रहें।’’

 उद्बोधनक्रम के पश्चात् कार्यक्रम में उपस्थित सभी भक्तों ने महाप्रसाद प्राप्त कर जीवन को धन्य बनाया।

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