यपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के द्वारा अपने एक ऐतिहासिक निर्णय में राज्य की एक महिला को ‘नाता विवाह’ के तहत कानूनी रूप से पति की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन का अधिकार दिया गया है। ‘नाता विवाह’ एक परंपरागत समझौते आधारित विवाह की प्रणाली है, जो राज्य के कुछ समुदायों में प्रचलित रही है। इस मामले में 60 वर्षीय राम प्यारी सुमन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उन्होंने राज्य सरकार से अपने पति, पूरन लाल सैनी, जो एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी थे, की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन जारी करने की मांग की। न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने 16 जनवरी को राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुमन को मृतक सैनी की कानूनी पत्नी के रूप में मानते हुए राजस्थान सिविल सर्विसेज (पेंशन) नियम, 1996 के तहत पेंशन जारी की जाए।




























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