Homeआयुर्वेदज़्यादा खटाई का सेवन नुक़सान दायक है

ज़्यादा खटाई का सेवन नुक़सान दायक है

खटाई का अधिक सेवन न करें, इससे आपके शरीर के कई नुक़सान पहुंच सकते हंै। नींबू, इमली, आंवला, अचार हो या टमाटर, खट्टी चीजों का स्वाद अमूमन सभी को पसंद आता है। गर्मियों में खासतौर पर लोग नींबू पानी या खट्टी चीजों का सेवन ज़्यादा करने लगते हैं। खट्टा स्वाद केवल स्वाद की संतुष्टि नहीं, बल्कि शरीर के लिए कुछ हद तक फायदेमंद भी हो सकता है- जैसे कि आंवले में विटामिन-सी की भरपूर मात्रा होती है। लेकिन जब यही खट्टा स्वाद लिमिट से ज़्यादा खाया जाए तो इसका सीधा असर पेट पर पड़ता है। प्राय: देखा गया है कि जिन लोगों को पेट में गैस, एसिडिटी या पेट फूलने की शिकायत रहती है, वे ज़्यादा खट्टा खाने के बाद और परेशान होजाते हैं। शरीर में एसिड का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे पाचन पर असर होता है और पेट से जुड़ी बीमारियाँ उत्पन्न होजाती हैं।  

 पेट में जलन और एसिडिटी 

खट्टे पदार्थों में सिट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, जो पेट की एसिडिटी को और बढ़ा देते हैं। इससे गैस्ट्रिक म्यूकोसा यानी पेट की परत में जलन होने लगती है। इसके कारण सीने में जलन, खट्टी डकारें और भोजन के बाद असहजता महसूस होती है।

अल्सर की संभावना  

लगातार खट्टा खाने से पेट की परत कमजोर पड़ सकती है, जिससे अल्सर बनने का खतरा बढ़ जाता है। इमली, अचार या बहुत ज़्यादा नींबू पानी का सेवन, पेट में सूजन और अल्सर को जन्म दे सकता है।

अपच, गैस और ब्लोटिंग 

ज़्यादा खट्टा खाने से पाचन तंत्र असंतुलित होजाता है। इससे भोजन ठीक से नहीं पचता और पेट में गैस बनने लगती है। साथ ही पेट भारी लगता है और भोजन के बाद सुस्ती आती है।

पेट की परत में सूजन  

खट्टे पदार्थ पेट की भीतरी परत पर बार-बार एसिड का हमला करते हैं, जिससे वह परत सूज जाती है। इसे मेडिकल भाषा में गैस्ट्राइटिस कहते हैं। इसका इलाज ना किया जाए, तो यह क्रॉनिक बन सकता है।

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