नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने साफ कर दिया है कि टोल टैक्स से छूट सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों और सेवाओं को ही मिलती है और इसकी बाकायदा एक आधिकारिक सूची जारी की गई है। इसमें से कुछ वाहन आपातकालीन सेवाओं से जुड़े होते हैं, तो कुछ खास पदों पर बैठे व्यक्तियों को भी यह सुविधा दी गई है।
आपात स्थिति में समय की अहमियत को देखते हुए एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को टोल टैक्स से छूट दी गई है। इन वाहनों को बिना किसी अड़चन के तेजी से मंज़िल तक पहुंचाने के लिए यह नियम लागू है। इसलिए यदि आप इन्हें टोल प्लाजा से बिना भुगतान किए गुज़रते हुए देखें, तो यह पूरी तरह वैध है।
इसी तरह भारत सरकार ने संविधान के अंतर्गत कुछ विशेष पदों पर आसीन व्यक्तियों को भी टोल टैक्स से छूट प्रदान की है, लेकिन सिर्फ और सिर्फ आधिकारिक यात्राओं के दौरान। इनमें शामिल हैं:—
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश। इनकी आवाजाही को सुगम बनाने और समय की बचत के लिए यह सुविधा दी गई है।
सांसद और विधायक को भी टोल टैक्स से छूट मिलती है, जब वे अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में यात्रा कर रहे हों। यह व्यवस्था जनप्रतिनिधियों के कार्य को बाधा रहित बनाने की दृष्टि से की गई है।
पुलिस, सेना और
अर्धसैनिक बलों के लिए शर्त
सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी टोल टैक्स से छूट प्राप्त है, लेकिन यह सुविधा तभी लागू होती है जब वे वर्दी में हों। यदि वे सामान्य कपड़ों में या निजी यात्रा पर हैं, तो उन्हें भी टोल टैक्स देना होता है। इस नियम का मकसद है कि देश की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात जवानों को ड्यूटी के दौरान कोई बाधा न हो।
विकलांग नागरिकों
के लिए प्रावधान
भारत सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए भी टोल टैक्स माफ किया है, बशर्ते उनके पास वैध विकलांगता प्रमाण पत्र हो और वे अपनी ट्राईसाइकिल या विशेष वाहन में यात्रा कर रहे हों। यह सुविधा उनके लिए यात्रा को सहज और सुलभ बनाने के उद्देश्य से दी गई है।
किसानों को
भी मिली राहत
कुछ राज्य सरकारों ने किसानों को भी टोल टैक्स से छूट दी है। यह निर्णय स्थानीय ज़रूरतों और सरकार की नीति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए यदि आप किसान हैं, तो संबंधित राज्य की टोल नीति ज़रूर जांच लें।
क्या 60 किलोमीटर से
कम दूरी पर भी टोल देना होगा?
बहुत से लोग ये मानते हैं कि अगर दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी 60 किलोमीटर से कम है, तो टोल नहीं देना पड़ेगा, लेकिन ऐसा कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है। इस मामले में टोल प्लाजा की वैधता, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और अनुबंध शर्तें मायने रखती हैं। इसलिए टोल देना होगा या नहीं, यह एनएचएआई के द्वारा स्वीकृत नियमों पर निर्भर करता है।



























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