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अषाढ़ शुक्ल सप्तमी को ऐसी नदी का जन्मदिन है, जिसके स्मरण मात्र से पुण्य का फल प्राप्त होता है

बुरहानपुर। आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को जन्मी ताप्ती नदी का वेद और पुराणों में विशेष उल्लेख है। ताप्ती को सूर्य की बेटी माना जाता है और इसके जल में पूजन, दीपदान, तर्प, पिडदान का विशेष महत्त्व है। ताप्ती तट पर देवऋषि नारद, शांडिल्य, चांगदेव, मार्कण्डेय, उद्धालक, गौतम, ईवासा के साथ कई ऋषियों ने तप किया।  ताप्ती देश की प्रमुख पवित्र नदियों में से एक है। पुरातन काल में नदी तटों को ही मनुष्य ने निवास के लिए उपयुक्त जाना और नदी तटों पर ही सभ्यता, संस्कृति और नगरों का निर्माण हुआ। इसलिए ब्रघ्नपुर (बुरहानपुर का पूर्व नाम) ताप्ती तट पर हज़ारों साल पूर्व से बसा है। ताप्ती को तापी, तापनाशनी और सूर्य तनया सहित अन्य नामों से जाना जाता है। इसका अर्थ ताप्ती त्रिविध ताप को शांत करने वाली है। गंगाजी में चिरकाल तक स्नान करने से, नर्मदा के दर्शन करने और सरस्वती के संगम के जल का पान करने से जो फल प्राप्त होता है, वह मां ताप्ती के केवल स्मरण मात्र से ही प्राप्त हो जाता है।

 गौरतलब है कि ताप्ती नदी मुलताई से 193 किमी तक बहकर बुरहानपुर पहुंचती है। ताप्ती का जल जीवित व मृतक दोनों के लिए वरदान है। ताप्ती का जल पवित्र और चर्म रोग मिटाने वाला है। कोढ़ का इलाज करने का भी गुण इस जल में है। नारदजी का कोढ़ग्रस्त शरीर और राजा भोसले के वंशज का रोगग्रस्त शरीर ताप्ती के स्नान करने से ही स्वस्थ हुआ। यही कारण है कि ताप्ती में विसर्जित अस्थियां शीघ्र गल जाती हैं। ताप्ती ने अपने पिता सूर्य का सदैव मान सम्मान बढ़ाया।  

 यह है ताप्ती का मार्ग

बुरहानपुर ज़िले में ताप्ती नदी देड़तलाई, तुकईथड़, पलासुर, सीवल, नावथा, लिंगा, नागझिरी, पिपलघाट, राजघाट, सतियारा घाट, बोहरड़ा, हतनूर, नाचनखेड़ा, पातोंडी से होकर अंतुर्ली महाराष्ट्र की ओर जाती है।

नदी घाटी एवं सहायक नदियां

ताप्ती नदी की घाटी का विस्तार कुल 65,145 किमी में है। यह घाटी क्षेत्र महाराष्ट्र में 51, 504 किमी, मध्यप्रदेश में 9,804 किमी एवं गुजरात में 3,837 किमी है। ये घाटी महाराष्ट्र उत्तरी एवं पूर्वी जिलों जैसे अमरावती, अकोला, बुलढाना, वाशिम, जलगांव, धुले, नंदुरबार एवं नासिक में फैली है। साथ ही मध्यप्रदेश के बैतूल और बुरहानपुर तथा गुजरात के सूरत एवं तापी जिलों में इसका विस्तार है। इसके जलग्रहण क्षेत्र का 79 फीसदी गुजरात शेष मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र राज्य में पड़ता है।

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