दिखने में सुन्दर और औषधीय पौधा है आइस फ्लावर, जो कि अन्य फसलों के साथ ही इसका उत्पादन किसानों की आय का जरिया बन चुका है। सीमित पानी और सीमित खाद में ही आइस फ़्लावर का भरपूर उत्पादन किया जा सकता है
इस पौधे की विशेषता इसकी पत्तियां हैं और इन पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तो ये चमकने लगती हैं, इसी कारण इसे ‘आइस फ्लावर’ और जहां इसका उत्पादन किया जाता है, उसे आइस प्लांट कहा जाता है।
कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि आइस फ्लावर की खेती उन क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहाँ पानी के स्रातों की कमी है और यह पौधा कम उपजाऊ तथा रेतीली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है।
आइस फ्लावर का उपयोग
आइस फ्लावर केवल सजावट के काम नहीं आता, बल्कि इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन और कई आयुर्वेदिक दवाइयाँ बनाने के लिए भी किया जा रहा है, जिससे इसकी मांग बढ़ रही है। विषय विशेषज्ञ बतलाते हैं कि यदि कृषक अपनी परंपरागत कृषिकार्य के साथ खेत की मेड़ों या रिक्त पड़ी रेतीली भूमि पर आइस फ्लावर की खेती करें, तो वे अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।




























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