मुंबई, महाराष्ट्र। सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के आशीर्वाद से नशामुक्त भारत, खुशहाल भारत के लक्ष्य को लेकर भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में डिग्री कॉलेज परिसर, सेक्टर 3ई सिडको कॉलोनी, कलम्बोली, नवी मुंबई में दिनांक 24-25 दिसम्बर को 24 घंटे के अखंड श्री दुर्गाचालीसा पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ में ‘माँ-गुरुवर के जयकारे लगवाए गए।
समापन बेला पर मध्यप्रदेश में स्थित पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम से पहुँचीं भगवती मानव कल्याण संगठन की केन्द्रीय अध्यक्ष सिद्धाश्रमरत्न शक्तिस्वरूपा बहन पूजा शुक्ला जी ने उपस्थित भक्तों को सम्बोधित करते हुए अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि ”जब हमारे आसपास अच्छी चेतनातरंगें होंगी, हमारे विचार अच्छे होंगे, तभी उत्कृष्ट कार्यों को सम्पादित किया जा सकेगा। परम पूज्य गुरुवरश्री ने कहा है कि हमें अपने विचारों और कर्म में पवित्रता लानी होगी, नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् व चेतनावान् जीवन जीने वाले व्यक्तियों के ही विचार और कर्म पवित्र होते हैं, अत: ऐसा जीवन हर मनुष्य को जीने की ज़रूरत है।
अनावश्यक चर्चाओं, कुसंगत और आलस्य में समय नष्ट न करें और अपने बच्चों को धर्मवान व कर्मवान बनाएं। अपने बच्चों को इतना अच्छा संस्कार दें कि वे कुसंगत में न पडऩे पाएं और अच्छे लोगों की संगत करें, इससे उनकी बुद्धि विकसित होगी तथा वे उच्चता की ओर बढ़ते चले जायेंगे। जब आप अपने बच्चों को अच्छा संस्कार देंगे, तभी वे आपकी बात मानेंगे और नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् व चेतनावानों का जीवन जीते हुए मानवता की सेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्ररक्षा जैसे मानवीय कत्र्तव्यों की ओर उन्मुख होंगे।
जब माता भगवती योग रचती हैं, तभी संयोग बनता है: अजय अवस्थी
भगवती मानव कल्याण संगठन के केन्द्रीय महासचिव अजय अवस्थी जी ने कहा कि ”महाराष्ट्र प्रदेश के मुंबई शहर का यह सौभाग्य है कि यहाँ 24 घंटे तक माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा के गुणगान के रूप में श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ का आयोजन सम्पन्न हुआ। जब माता भगवती योग रचती हैं, तभी संयोग बनता है और जिनके सौभाग्य में होता है, वही उनकी साधना-आराधना में सम्मिलित हो पाता है और जितने लोग इस दिव्य अनुष्ठान में पहुँचे हैं, निश्चित रूप से उन पर ‘माँ की कृपा है।
श्री दुर्गाचालीसा का अखंड पाठ कोई साधारण पाठ नहीं है। यदि यह पाठ किसी मंदिर में किया जाता है, तो वहाँ की मूर्तियाँ जाग्रत् होजाती हैं। यह युग मानवीयमूल्यों के पतझड़ का युग है, मानवीयमूल्यों के क्षरण का युग है। आज लोग नाना प्रकार के भय से ग्रसित हैं, भय इतना कि कहीं कुछ हो न जाए। लोगों की भूख इतनी बढ़ चुकी है कि किसी में सन्तोष नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। कोई लखपति है, तो करोड़पति बनना चाहता है और जो करोड़पति है, वह अरबपति बनना चाहता है, उनकी भूख बढ़ती ही जा रही है और यही कारण है कि लोगों का जीवन अशान्त है। जब तक आप नशे-मांसाहार से मुक्त चरित्रवान् जीवन नहीं अपनायेंगे, भय और कामना से मुक्त नहीं होंगे, तब तक जीवन में शान्ति आ पाना संभव नहीं है।




























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