संकल्प शक्ति। मानवीय शक्ति के आधान के लिए सुसंस्कृत होना आवश्यक है। इस हेतु विधिपूर्वक संस्कार सम्पन्न करने चााहिए। संस्कारों से अन्त:करण शुद्ध होता है तथा संस्कार आचार-विचार और ज्ञान-विज्ञान से समन्वित करते हैं।
दिनांक 24 अक्टूबर 2025 को पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम स्थित मूलध्वज साधना मंदिर पर सद्गुरुदेव श्री शक्तिपुत्र जी महाराज और पूजनीया शक्तिमयी माता जी के पावन सान्निध्य में सिद्धाश्रम चेतना आरूणी जी का कर्णवेध संस्कार समारोहपूर्वक सम्पन्न किया गया।
इस संस्कार से ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए परिपक्वता आती है। इस अवसर पर पारिवारिकजनों, सिद्धाश्रमवासियों और सिद्धाश्रम आए हुए गुरुभाई-बहनों व ‘माँ’ के भक्तों में अत्यन्त ही उत्साह परिलक्षित था। निर्धारित समय पर प्रात: 09 बजे सभी मूलध्वज साधना मंदिर पहुँचे और कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद प्रसादरूप में बूंदी के लड्डू प्राप्त किए।
कर्णवेध संस्कार सम्पन्न होने के पश्चात् सभी सिद्धाश्रमवासी और भक्तगण अन्नपूर्णा भंडारा परिसर पहुँचे और भोजन प्रसाद के रूप में मटर पनीर, फूलगोभी-आलू-मटर की सब्जी, पुलाव, पूड़ी एवं आलू चाप, सलाद, फुलकी, दहीबड़ा व रसगुल्ला ग्रहण करके तृप्त हुए। ऐसा है सिद्धाश्रम धाम, जहाँ नि:शुल्क रूप से शारीरिक व आध्यात्मिक दोनों प्रकार का आहार प्राप्त होता है।




























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