हिन्दूधर्म के पुनरुत्थान और लोगों में अन्तर्चेतना के विकास के लिए धर्मसम्राट् युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के द्वारा माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की प्रेरणा से 23 जनवरी 1997 को पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम की स्थापना करके 15 अप्रैल 1997 को श्री दुर्गाचालीसा का अखण्ड पाठ अनन्तकाल के लिए प्रारम्भ कराया गया है और जनकल्याण हेतु प्रारम्भ इस दिव्य व अलौकिक अनुष्ठान के स्वर्णिम 25 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।
विषय-विकारों से ग्रसित इन्द्रियाँ जो मन को भटकाकर पतन की ओर ढकेल रही हैं, उन पर नियंत्रण पाने के लिए एकमात्र उपाय है श्री दुर्गाचालीसा पाठ। अत: विगत 25 वर्षों से अनन्तकाल के लिए प्रारम्भ श्री दुर्गाचालीसा अखण्ड पाठ को विश्वव्यापी बनाने के लिए सिद्धाश्रम धाम में विशाल आयताकार रूप में ऐसे चालीसा पाठ मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे मानवसमाज ‘माँ’ के गुणगान के माध्यम से मन के दूषित विचारों की दिशा को सात्विक विचारों की ओर मोड़़कर अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण प्राप्त कर सके।





























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